सीजी भास्कर, 8 जनवरी। इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित 1,500 करोड़ रुपये दिल्ली भेजने से जुड़े वीडियो ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सवाल उठाया है कि ज़ीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सरकार इस गंभीर मामले की जांच आखिर कब और किस एजेंसी से कराएगी। बघेल ने स्पष्ट शब्दों में पूछा है कि क्या इस प्रकरण की जांच प्रवर्तन निदेशालय को सौंपी जाएगी या फिर मामला राजनीतिक संरक्षण में दबा दिया जाएगा। यह पूरा विवाद अब (1500 Crore Video Controversy Chhattisgarh) के रूप में प्रदेश की सियासत का केंद्र बन गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि कुछ दिन पहले इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो व्यापक रूप से प्रसारित हुआ था, जिसमें 1,500 करोड़ रुपये दिल्ली भेजने की बात कही जा रही थी। इस वीडियो को लेकर भाजपा के एक विधायक ने अपराध दर्ज कराया था, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जेल में बंद मुख्य आरोपित ‘रणनीति’ नामक इंटरनेट मीडिया एजेंसी का प्रमुख बताया जा रहा है। बघेल ने सवाल उठाया कि जिस एजेंसी के प्रमुख को मुख्य आरोपी बताया जा रहा है, वह स्वयं एक भाजपा नेता का बेटा है, तो फिर यह वीडियो किसके इशारे पर जारी किया गया। यह सवाल (1500 Crore Video Controversy Chhattisgarh) को और गंभीर बना देता है।
भूपेश बघेल ने आगे कहा कि एजेंसी प्रमुख ने अपने बयान में दो बड़े भाजपा नेताओं का नाम लिया है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि वे दो बड़े नेता कौन हैं और उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने पूछा कि यदि मामला इतना गंभीर है, तो जांच केवल निचले स्तर तक सीमित क्यों रखी जा रही है। क्या बड़े नामों पर हाथ डालने से सरकार डर रही है। बघेल ने इसे राजनीतिक संरक्षण का मामला बताते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। (1500 Crore Video Controversy Chhattisgarh) अब केवल एक वीडियो का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सत्ता और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी पूछा कि 1,500 करोड़ रुपये की कथित वसूली का असली सूत्रधार कौन है। पैसा कहां से इकट्ठा होना था और कहां भेजा जाना था, इसकी सच्चाई सामने क्यों नहीं लाई जा रही। उन्होंने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। जब इस मामले में अपराध दर्ज हो चुका है और लोग जेल में हैं, तो ईडी को जांच में देरी क्यों हो रही है। बघेल ने कहा कि ईडी जब विपक्ष के मामलों में तुरंत सक्रिय हो जाती है, तो यहां उसकी चुप्पी कई तरह के संदेह पैदा करती है। (1500 Crore Video Controversy Chhattisgarh) में दोहरे मापदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं, यह प्रदेश की जनता जानना चाहती है।
भूपेश बघेल ने अपने बयान में कहा कि देश और प्रदेश यह जानना चाहता है कि इतना बड़ा अमाउंट किस उद्देश्य से जुटाया जा रहा था और इसके पीछे कौन लोग थे। यदि सरकार सच में पारदर्शिता और ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है, तो उसे इस मामले की निष्पक्ष और एजेंसी-स्तरीय जांच करानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर चुप्पी साधना सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है। (1500 Crore Video Controversy Chhattisgarh) अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह लोकतंत्र, जवाबदेही और जांच की विश्वसनीयता से भी जुड़ गया है।


