सीजी भास्कर, 1 जनवरी। केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में ग्रामीण स्थानीय निकायों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission Grant Chhattisgarh) के तहत 224 करोड़ से अधिक की अनुदान राशि जारी की है। यह राशि वित्त वर्ष 2025-26 की अनटाइड अनुदान की पहली किस्त के रूप में दी गई है, जिससे राज्य में पंचायती राज व्यवस्था को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने की प्रक्रिया को नई गति मिलेगी।
केंद्र सरकार द्वारा 224.5762 करोड़ की यह राशि 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण स्थानीय निकायों को प्रदान की गई है। इस अनुदान का लाभ राज्य की 11,279 पात्र ग्राम पंचायतों, 138 पात्र जनपद पंचायतों और 26 पात्र जिला पंचायतों को मिलेगा। इस राशि से गांव स्तर पर विकास कार्यों के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।
भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) के माध्यम से पंचायती राज संस्थानों और ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए राज्यों को 15वें वित्त आयोग की अनुदान राशि जारी करने की सिफारिश की जाती है, जिसे अंततः वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, एक वित्तीय वर्ष में यह अनुदान दो किस्तों में राज्यों को उपलब्ध कराया जाता है।
अनटाइड अनुदानों का उपयोग पंचायती राज संस्थानों और ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में उल्लिखित 29 विषयों के अंतर्गत किया जाएगा। इन अनुदानों का उपयोग वेतन और अन्य स्थापना व्ययों को छोड़कर, स्थानीय स्तर की आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों के लिए किया जा सकेगा। इससे ग्राम पंचायतों को अपने क्षेत्र की प्राथमिक जरूरतों के अनुरूप योजनाएं लागू करने में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होगी।
वहीं, टाइड अनुदानों का उपयोग स्वच्छता और खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति के सतत रखरखाव के लिए किया जा सकता है। इसके अंतर्गत घरेलू अपशिष्ट प्रबंधन, अपशिष्ट उपचार, विशेष रूप से मानव मल और मल कीचड़ प्रबंधन जैसे कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही टाइड अनुदान का उपयोग पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण जैसी बुनियादी सेवाओं के विकास के लिए भी किया जाएगा।
15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission Grant Chhattisgarh) के तहत जारी यह अनुदान छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास, स्वच्छता, पेयजल और आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय शासन की क्षमता बढ़ेगी और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने में पंचायतों को सीधा लाभ मिलेगा।


