सीजी भास्कर 22 अप्रैल
कांकेर जिले के हार्वेस्टर मालिकों की समस्याओं को देखते हुए महानदी हार्वेस्टर संघ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। संघ ने अब जिले में बाहर से आने वाले हार्वेस्टरों के काम करने पर रोक लगा दी है। यह फैसला स्थानीय हार्वेस्टर मालिकों के हितों की रक्षा के लिए लिया गया है।
संघ के अनुसार बाहरी हार्वेस्टर कम दरों पर काम करते हैं, जिससे स्थानीय मालिकों को पर्याप्त काम नहीं मिल पाता। इसके चलते उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है और समय पर बैंक किस्तों का भुगतान करना भी मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति से स्थानीय हार्वेस्टर मालिकों को लगातार नुकसान हो रहा था।
इन समस्याओं के समाधान के लिए महानदी हार्वेस्टर संघ कांकेर ने अपना पंजीकरण भी कराया है। संघ अब कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम करेगा, जिसका उद्देश्य स्थानीय हार्वेस्टर उद्योग को मजबूत करना है।
बाहरी हार्वेस्टरों पर रोक और दरों का निर्धारण
संघ के मुख्य उद्देश्यों में धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद और रायपुर जैसे जिलों से आने वाले हार्वेस्टरों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना शामिल है। इसके साथ ही धान कटाई के लिए न्यूनतम दर 3000 रुपये और अधिकतम 3500 रुपये निर्धारित की गई है।
डिफॉल्टर किसानों की सूची और ऑपरेटर नियम
संघ डिफॉल्टर किसानों की पहचान कर उनकी सूची तैयार करेगा और हार्वेस्टर मालिकों के बकाया भुगतान दिलाने में सहायता करेगा। इसके अलावा हार्वेस्टर ऑपरेटरों के लिए भी नियम तय किए जाएंगे। यदि कोई ऑपरेटर बिना सूचना के काम छोड़ता है, तो उसे कांकेर जिले में दोबारा काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
डीलर और अन्य समस्याओं पर संघ का समर्थन
महानदी हार्वेस्टर संघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई डीलर मशीन बेचने के बाद उचित सेवा नहीं देता या किसी प्रकार की परेशानी उत्पन्न करता है, तो संघ मालिकों के साथ खड़ा रहेगा। हार्वेस्टर से जुड़ी किसी भी समस्या में संघ उनके हितों की रक्षा के लिए आगे रहेगा।


