सीजी भास्कर, 25 अप्रैल : बस्तर की शांति में जहर घोलने वाली एक ऐसी साजिश (Bastar Missionary News) का खुलासा हुआ है जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। अमेरिकी मिशनरी संस्था ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ (टीटीआई) के तार बस्तर के घने जंगलों और नक्सल प्रभावित इलाकों से सीधे जुड़ते नजर आ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में इस खबर ने हड़कंप मचा दिया है कि कैसे विदेशी डेबिट कार्डों का इस्तेमाल कर बस्तर की जमीन पर करोड़ों की नकदी पानी की तरह बहाई गई। आशंका है कि यह पैसा सुरक्षाबलों के खिलाफ उग्र गतिविधियों को तेज करने के लिए एक समानांतर वित्तीय नेटवर्क की तरह इस्तेमाल हो रहा था।
विदेशी कार्ड और बस्तर का ‘ब्लैक ट्रांजेक्शन’
सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आई अमेरिकी संस्था टीटीआई ने बस्तर को अपना गुप्त अड्डा बना लिया था। अमेरिका के ट्रुइस्ट बैंक के डेबिट कार्ड भारत लाकर यहां के एटीएम से नकद निकासी की गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस लेनदेन (Bastar Missionary News) का सबसे बड़ा हिस्सा बस्तर और धमतरी जैसे संवेदनशील इलाकों में निकाला गया। पिछले कुछ ही वर्षों में करीब 6.5 करोड़ रुपये एटीएम से निकालकर सीधे हाथों में पहुंचा दिए गए, ताकि बैंकिंग निगरानी की नजरों से बचा जा सके।
हैरानी इस बात पर है कि टीटीआई संस्था का भारत में एफसीआरए के तहत कोई पंजीकरण ही नहीं है। बिना किसी कानूनी अनुमति के विदेशी पैसे को बस्तर में डंप करना किसी गहरी और खतरनाक साजिश की ओर इशारा कर रहा है।
94 करोड़ का खौफनाक आंकड़ा और मीकाह का जाल
इस पूरे नेटवर्क की जड़ें तब हिलीं जब बेंगलुरु एयरपोर्ट से मीकाह मार्क को दबोचा गया। उसके पास मिले 24 विदेशी डेबिट कार्ड इस षड्यंत्र के असली हथियार थे। जांच में खुलासा हुआ कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच महज पांच महीनों के भीतर इस नेटवर्क (Bastar Missionary News) ने भारत में करीब 95 करोड़ रुपये का प्रवाह किया। इस पूरे खेल को विदेश में बैठे आका एक ऑनलाइन बिलिंग प्लेटफार्म के जरिए कंट्रोल कर रहे थे, ताकि भारतीय एजेंसियों को भनक तक न लगे।
छापेमारी में 25 विदेशी डेबिट कार्ड और 40 लाख रुपये की नकदी बरामद होना केवल एक ट्रेलर है। एजेंसियों को शक है कि बस्तर के दुर्गम इलाकों में यह नेटवर्क काफी गहराई तक अपनी पैठ बना चुका है।
जांच के घेरे में ‘सफेदपोश’ मददगार
क्या बस्तर के कुछ स्थानीय लोग भी इस विदेशी चंदे की मलाई खा रहे थे? जांच एजेंसियां अब उन चेहरों को बेनकाब करने में जुट गई हैं जो अमेरिकी डॉलरों को बस्तर में खपाने में मदद कर रहे थे। यह मामला (Bastar Missionary News) इसलिए भी गंभीर है क्योंकि बस्तर जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्र में इतनी भारी मात्रा में नकदी का पहुंचना बिना किसी बड़ी उग्रवादी योजना के मुमकिन नहीं है। वित्तीय निगरानी तंत्र को चकमा देने के लिए नकद निकासी का यह ‘बस्तर मॉडल’ देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा रेड सिग्नल है। प्रशासन अब टीटीआई से जुड़े हर एक संपर्क की कुंडली खंगाल रहा है। निश्चित रूप से, विदेशी फंडिंग की इस जानकारी (Bastar Missionary News) के सामने आने के बाद अब बस्तर में कई बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।


