सीजी भास्कर, 25 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के वन संपदा पर भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों के खूनी पंजों का एक ऐसा खौफनाक (ISRO Forest Survey Report) सच सामने आया है, जिसने सरकार और पर्यावरणविदों के होश उड़ा दिए हैं। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के सख्त तेवरों के बाद, उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व के ‘कोर ज़ोन’ में हुए महाविनाश का पर्दाफाश हुआ है। इस हाई-टेक पड़ताल ने साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक के आगे अब जंगल के दुश्मन छुप नहीं पाएंगे। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की सैटेलाइट तस्वीरों और हाई-रिज़ॉल्यूशन ड्रोन सर्वे के डिजिटल सबूतों ने इस बात की पुष्टि की है कि पिछले 15 सालों में टाइगर रिज़र्व के दिल (कोर एरिया) में करीब एक लाख पेड़ों की बेरहमी से कटाई की गई है।
इसरो की ‘आंख’ और ड्रोन की ‘नज़र’ से खुला राज
वन विभाग द्वारा जारी इस रिपोर्ट (ISRO Forest Survey Report) के अनुसार, अतिक्रमणकारियों ने लगभग 106 हेक्टेयर (265 एकड़) बेशकीमती वन भूमि पर अवैध कब्ज़ा कर लिया। डिजिटल फोरेंसिक जांच में इसरो की कार्टा सैट सैटेलाइट इमेजरी (वर्ष 2006, 2008, 2010, 2012 और 2022) का विश्लेषण किया गया, जिससे वन क्षेत्र में तेजी से आई कमी का अकाट्य प्रमाण मिला। ड्रोन सर्वे से तैयार हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेजरी में अतिक्रमण क्षेत्र के प्रत्येक खेत, कटे हुए पेड़ और यहाँ तक कि ठूंठ को भी स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है। आँकड़े बताते हैं कि जहाँ पहले एक हेक्टेयर में लगभग 1000 पेड़ थे, वहां अब यह संख्या घटकर मात्र 25 से 50 रह गई है।
‘गर्डलिंग’ तकनीक से जंगल को पहुंचाया नुकसान
जांच में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि अतिक्रमणकारियों ने न केवल पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की, बल्कि “गर्डलिंग” जैसी खतरनाक तकनीकों का उपयोग कर वृक्षों को खड़ा सुखाकर जमीन खाली की। यह अतिक्रमण (ISRO Forest Survey Report) मुख्य रूप से टाइगर रिज़र्व के बाहर स्थित जैतपुरी गांव के 166 लोगों द्वारा किया गया। सबसे शर्मनाक बात यह है कि कई आरोपियों के पास पहले से ही राजस्व भूमि मौजूद होने के बावजूद, उन्होंने लालचवश वन भूमि पर कब्ज़ा किया। वर्ष 2011 में जो अतिक्रमण मात्र 45 हेक्टेयर में था, वह समय के साथ बढ़कर 106 हेक्टेयर हो गया।
166 अतिक्रमणकारियों पर ‘बुलडोजर’ जैसी कार्रवाई की तैयारी
वन विभाग ने इस खुलासे (ISRO Forest Survey Report) के बाद जैतपुरी गांव के 166 चिन्हित लोगों के विरुद्ध विभिन्न प्रकरण दर्ज कर उन्हें बेदखली नोटिस जारी कर दिए हैं। यह क्षेत्र न केवल महानदी का उद्गम स्थल है, बल्कि हाथी, तेंदुआ और बाघ जैसे दुर्लभ वन्यप्राणियों का महत्वपूर्ण आवास भी है। अतिक्रमण से यहाँ की पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और लोक संपत्ति क्षति अधिनियम के तहत 7 साल तक की जेल और अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों को अटैच करने जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिज़र्व प्रबंधन ने पिछले 3 वर्षों में पहले ही 850 हेक्टेयर अतिक्रमण हटाया है तथा 600 से अधिक शिकारी, तस्कर और अतिक्रमणकारियों को गिरफ्तार किया है। बेदखली के बाद अतिक्रमित भूमि पर भू-जल संरक्षण संरचनाएं विकसित की जाएंगी और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर क्षेत्र की पारिस्थितिकी को पुनर्स्थापित किया जाएगा। यह कार्रवाई इस जानकारी (ISRO Forest Survey Report) के संदर्भ में यह संदेश है कि वन संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।



