सीजी भास्कर, 27 अप्रैल : छत्तीसगढ़ की पावन धरती एक बार फिर इतिहास के पन्नों (CG Ancient Heritage Discovery) से निकलकर दुनिया के सामने अपनी महानता की गवाही दे रही है। बिलासपुर जिले के सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल मल्हार से एक ऐसी दुर्लभ खोज सामने आई है, जिसने भारतीय पुरातत्व और इतिहास के विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। यहां ‘ज्ञान भारतम अभियान’ के तहत संजीव पांडेय के निवास से एक अति दुर्लभ और वजनी ताम्रपत्र (Copper Plate Inscription) बरामद हुआ है। 3 किलोग्राम से अधिक वजनी यह धातु पत्र महज एक टुकड़ा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की उस प्राचीन विरासत का हिस्सा है जो सदियों से धूल फांक रही थी।
बौद्ध काल का अनमोल खजाना
प्रारंभिक जांच और विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, यह ऐतिहासिक दस्तावेज (CG Ancient Heritage Discovery) लगभग 2000 वर्ष पुराना है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पर प्राचीन ‘ब्राह्मी लिपि’ और ‘पाली भाषा’ में संदेश उत्कीर्ण हैं। ब्राह्मी लिपि को भारत की समस्त लिपियों की जननी माना जाता है, जिसका उपयोग महान सम्राट अशोक ने अपने शिलालेखों में किया था। वहीं, पाली भाषा का सीधा संबंध भगवान बुद्ध की शिक्षाओं और प्राचीन बौद्ध साहित्य से है। इस खोज ने यह संकेत दे दिए हैं कि छत्तीसगढ़ का यह क्षेत्र कभी धार्मिक और सांस्कृतिक शिक्षा का एक वैश्विक केंद्र रहा होगा ।
क्या इस ताम्रपत्र में छिपा है किसी बड़े साम्राज्य का आदेश
इतिहासकारों का मानना है कि प्राचीन काल (CG Ancient Heritage Discovery) में इस तरह के ताम्रपत्रों का इस्तेमाल केवल बेहद महत्वपूर्ण कार्यों के लिए ही किया जाता था। अक्सर राजा-महाराजा इनका उपयोग भूमि दान के रिकॉर्ड (दानपत्र), राजकीय आदेशों के दस्तावेजीकरण या महत्वपूर्ण धार्मिक घोषणाओं के लिए करते थे। विशेषज्ञों का मानना है कि मल्हार से मिला यह ताम्रपत्र उस समय की शासन व्यवस्था, सामाजिक ढांचे और धार्मिक रीति-रिवाजों की ऐसी जानकारियां दे सकता है, जो अब तक इतिहास की किताबों में दर्ज नहीं हैं। जैसे ही यह खबर फैली, शोधकर्ताओं की टीमें विस्तृत अध्ययन के लिए वहां पहुंचे ।
ज्ञान भारतम अभियान की जादुई सफलता और डिजिटल भविष्य
यह बड़ी उपलब्धि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘ज्ञान भारतम अभियान’ के तहत मिली है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में दबे हुए प्राचीन पांडुलिपियों और ऐतिहासिक दस्तावेजों को खोजकर उन्हें संरक्षित करना है। अब इस दुर्लभ ताम्रपत्र का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाएगा ताकि इसकी धातु संरचना और लेखन शैली के आधार पर इसके सटीक कालखंड का पता लगाया जा सके। प्रशासन अब इन ऐतिहासिक निधियों को डिजिटल रूप में भी सहेजने की तैयारी कर रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां छत्तीसगढ़ के इस गौरवशाली और समृद्ध ज्ञान परंपरा को समझ सकें और इस पर गर्व कर सकें। इस खोज ने साबित कर दिया है कि जहां भी खुदाई होगी, वहां से छत्तीसगढ़ का वैभव निकलकर सामने आएगा पहुंचे।


