सीजी भास्कर, 29 अप्रैल : तेजी से बदलते सामाजिक ढांचे में रिश्तों की जटिलताएं नई चुनौतियां पेश कर रही हैं। अक्सर घर की चारदीवारी के भीतर बुजुर्गों की उपेक्षा या पुरुषों का मानसिक तनाव अनसुना रह जाता है। लेकिन छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले ने इस खामोशी को आवाज देने का एक नया रास्ता दिखाया है। दुर्ग में शुरू हुई जेंडर-बैलेंस्ड काउंसलिंग व्यवस्था आज पारिवारिक विवाद समाधान का एक ऐसा समावेशी माडल बनकर उभरी है, जिसकी गूंज अब राष्ट्रीय स्तर तक सुनाई दे रही है। इस (Gender Balanced Counseling Model Durg) की सफलता ने सामाजिक स्थिरता की नई नींव रखी है।
महिलाओं के साथ अब पुरुषों की भी सुनी जा रही बात
सेक्टर-6 स्थित महिला थाना का परिवार परामर्श केंद्र, जो पहले मुख्यतः महिलाओं की शिकायतों तक सीमित था, अब एक व्यापक सामाजिक मंच बन चुका है। यहां महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों और वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं को भी समान गंभीरता और संवेदनशीलता से सुना जा रहा है। उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप शुरू हुआ यह केंद्र अब जेंडर-बैलेंस्ड काउंसलिंग को लागू कर चुका है, जिससे हर पक्ष को निष्पक्ष सुनवाई का अवसर मिल रहा है। (Gender Balanced Counseling Model Durg) के तहत अब विवादों का निपटारा अधिक पारदर्शी तरीके से हो रहा है।
पुरुष काउंसलर की नियुक्ति से आया संतुलन
इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी पुरुष काउंसलर की नियुक्ति है। पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया कि पुरुष भी मानसिक, आर्थिक और वैवाहिक तनाव से जूझते हुए परामर्श केंद्र तक पहुंच रहे हैं। उनकी बात को गहराई से समझने और संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखने के लिए यह कदम बेहद प्रभावी साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस (Gender Balanced Counseling Model Durg) को समय की मांग बताया है। उनका मानना है कि काउंसलिंग आधारित समाधान से विवादों को प्रारंभिक स्तर पर ही सुलझाया जा सकता है।
बुजुर्गों के लिए ‘सीनियर सिटीजन सपोर्ट बेंच’
इस व्यवस्था की एक और बड़ी उपलब्धि ‘सीनियर सिटीजन सपोर्ट बेंच’ का गठन है। इस विशेष इकाई में रिटायर्ड अधिकारी और मनोवैज्ञानिक शामिल हैं, जो बुजुर्गों से जुड़े संवेदनशील मामलों को सुनते हैं। बेटे-बहू द्वारा प्रताड़ना, संपत्ति के लिए दबाव या घर से निकाल देने जैसी शिकायतें अब खुलकर सामने आ रही हैं। जहां पहले बुजुर्ग अपनी व्यथा कहने से डरते थे, वही अब उन्हें एक सुरक्षित मंच मिला है। इस (Gender Balanced Counseling Model Durg) के माध्यम से अब तक लगभग 200 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें से 130 मामलों का सफल निराकरण किया जा चुका है।
राष्ट्रीय स्तर पर बन रही नई पहचान
दुर्ग का ‘काउंसलिंग-फर्स्ट’ माडल छत्तीसगढ़ में अपनी तरह की पहली पहल है। वहां तैनात पुलिस अधिकारी और काउंसलर संवाद के जरिए परिवारों को टूटने से बचा रहे हैं। जहां कई राज्यों में अब भी पारंपरिक और एकतरफा दृष्टिकोण हावी है, वही दुर्ग ने महिलाओं, पुरुषों और बुजुर्गों सभी को एक मंच पर समान रूप से सुनने का संतुलित रास्ता दिखाया है। इसी कारण यह (Gender Balanced Counseling Model Durg) अब राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी उदाहरण बनकर उभर रहा है, जिसे अन्य राज्य भी अपनाने की तैयारी कर रहे हैं।


