सीजी भास्कर, 29 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के युवा अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक मछली पालन को अपनाकर सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं। रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा विकासखंड के ग्राम बेलदार सिवनी निवासी प्रकाश धीवर आज क्षेत्र के किसानों के लिए रोल माडल बन गए हैं। शासन की (PM Matsya Sampada Yojana Chhattisgarh) और विभागीय सहयोग से उन्होंने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि 20 अन्य लोगों के लिए भी आजीविका का रास्ता खोला है।
12वीं के बाद शुरू किया सफर
प्रकाश धीवर ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद किसी नौकरी के पीछे भागने के बजाय स्वरोजगार को चुना। उन्होंने मछली पालन विभाग से मार्गदर्शन लेकर ‘जय महामाया मछुआ सहकारी समिति’ का गठन किया। वहां उन्होंने ग्राम पंचायत के तालाबों को नियमानुसार 10 साल के पट्टे पर लिया और निजी तालाबों को लीज पर लेकर मछली पालन का कार्य आरंभ किया। आज उनकी समिति के पास कुल पांच तालाब (8.835 हेक्टेयर) हैं, जहाँ प्रतिवर्ष 25 टन तक मछली उत्पादन हो रहा है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का मिला साथ
प्रकाश की सफलता में केंद्र सरकार की (PM Matsya Sampada Yojana Chhattisgarh) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। योजना के तहत उन्हें 40 प्रतिशत अनुदान पर एक चार पहिया वाहन प्राप्त हुआ है। यहां फायदा यह हुआ कि अब वे अपनी उपज को रायपुर, खरोरा और बलौदा बाजार जैसे बड़े बाजारों में ‘जीवित मछली’ के रूप में बेच पाते हैं, जिससे उन्हें मंडी में बेहतर दाम मिलते हैं। इस आधुनिक व्यवस्था से उनकी वार्षिक आमदनी 15 से 20 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
केसीसी से मिला आर्थिक संबल
मछली पालन में बीज, जाल और चारे की व्यवस्था के लिए प्रकाश ने जिला सहकारी बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से 3 लाख रुपये का ऋण भी लिया है। जहां पहले पूंजी के अभाव में काम रुक जाता था, वही अब न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण मिलने से व्यवसाय में निरंतरता बनी रहती है। प्रकाश का कहना है कि शासन की योजनाओं ने उनके जैसे युवाओं को अपनी जमीन पर ही बड़ा कारोबार खड़ा करने का साहस दिया है।
20 परिवारों को मिल रहा सहारा
आज प्रकाश धीवर अकेले सफल नहीं हैं। उनकी समिति से 21 सदस्य जुड़े हुए हैं और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से वे 15 से 20 स्थानीय लोगों को रोजगार दे रहे हैं। (PM Matsya Sampada Yojana Chhattisgarh) के माध्यम से मिली यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण का एक बेहतरीन उदाहरण है। शासन की नीतियों और प्रकाश की मेहनत ने मिलकर बेलदार सिवनी को मत्स्य पालन का केंद्र बना दिया है।


