सीजी भास्कर, 30 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचलों में सुशासन और विकास (Niyad Nella Naar 2.0) की एक नई सुबह होने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में राज्य के मूल निवासियों के सर्वांगीण विकास को लेकर कई क्रांतिकारी निर्णय लिए गए हैं. इस बैठक का सबसे प्रमुख केंद्र बिंदु राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नियद नेल्ला नार 2.0 (Niyad Nella Naar 2.0) की घोषणा रही, जो आने वाले समय में बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों की तस्वीर बदलने का माद्दा रखती है.
विकास की नई धारा और जनजातीय अस्मिता
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर का क्षेत्र भौगोलिक रूप से केरल जैसे राज्य से भी बड़ा है, लेकिन दशकों तक यह क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से कटा रहा. अब समय आ गया है कि इन क्षेत्रों में योजनाओं का तीव्र विस्तार किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद अब इन क्षेत्रों में विकास की नई धारा स्थापित हो रही है और इसी क्रम में नियद नेल्ला नार 2.0 (Niyad Nella Naar 2.0) को जल्द धरातल पर उतारा जाएगा. मुख्यमंत्री ने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को अपनी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया. उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और वहां होने वाले किसी भी प्रकार के अवैध अतिक्रमण को कड़ाई से रोका जाए.
मूलभूत सुविधाओं का होगा विस्तार
बैठक में पिछली योजनाओं की समीक्षा करते हुए बताया गया कि “धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना” के माध्यम से प्रदेश के 6600 गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है. इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए नियद नेल्ला नार 2.0 (Niyad Nella Naar 2.0) के अंतर्गत सुदूर अंचलों में बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि पीएम जनमन योजना के तहत राज्य में 32 हजार आवासों की स्वीकृति दी जा चुकी है, जो जनजातीय परिवारों के जीवन स्तर को सुधारने में मील का पत्थर साबित होंगे.
स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष ध्यान
जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना” के तहत अब तक 36 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है. इस अभियान की सफलता को देखते हुए नियद नेल्ला नार 2.0 (Niyad Nella Naar 2.0) के आगामी चरणों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक सुलभ बनाया जाएगा. शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए मुख्यमंत्री ने छात्रावासों की सीट वृद्धि, उनके बेहतर रखरखाव और शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया. उन्होंने नक्सल मुक्त हुए क्षेत्रों के बच्चों के लिए त्वरित शिक्षण व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए और यह स्पष्ट किया कि किसी भी हाल में कक्षाएं खुले में संचालित नहीं होनी चाहिए.
भूमि अधिकारों की सुरक्षा और कानूनी पहल
बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ने जनजातीय भूमि के दीर्घकालीन लीज पर दोहन के मामलों की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा, कोरवा और संसारी उरांव जातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के प्रस्ताव को शीघ्र केंद्र सरकार को भेजने की प्रक्रिया तेज करने को कहा गया है. यह कदम नियद नेल्ला नार 2.0 (Niyad Nella Naar 2.0) के सामाजिक न्याय के उद्देश्यों को पूरा करने में सहायक होगा.
नक्सलवाद के खात्मे से खुला विकास का द्वार
आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने बैठक में कहा कि पिछले चार दशकों से नक्सलवाद विकास की सबसे बड़ी बाधा बना हुआ था. अब इस चुनौती से मुक्ति मिलने के बाद जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो सका है. उन्होंने विश्वास जताया कि नियद नेल्ला नार 2.0 (Niyad Nella Naar 2.0) के माध्यम से जनजातीय समुदाय तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त होंगे. नेताम ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से संवेदनशील मुद्दों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने का आग्रह किया.
अधोसंरचना और भविष्य की कार्ययोजना
अम्बिकापुर नेशनल हाईवे के निर्माण में हो रही देरी पर मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कार्यों को गुणवत्तापूर्ण ढंग से समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान कटने वाले ग्रामीण मार्गों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि नियद नेल्ला नार 2.0 (Niyad Nella Naar 2.0) का लाभ साल भर निर्बाध रूप से मिलता रहे. इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वनमंत्री केदार कश्यप और कई वरिष्ठ विधायक एवं अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने जनजातीय विकास के इस रोडमैप का समर्थन किया. कुल मिलाकर, जनजातीय सलाहकार परिषद की यह बैठक छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के लिए विकास का एक नया विजन लेकर आई है, जिसमें नियद नेल्ला नार 2.0 (Niyad Nella Naar 2.0) मुख्य आधार स्तंभ होगा.


