सीजी भास्कर, 14 मई : देश में आम आदमी की जेब पर महंगाई (Wholesale Price Index) का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 8.30% पर पहुंच गई है। मार्च में यह आंकड़ा 3.88% था। गौरतलब है कि यह पिछले 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है; इससे पहले अक्टूबर 2022 में थोक महंगाई 8.39% दर्ज की गई थी।
ईंधन और बिजली की कीमतों में आग
थोक महंगाई में इस बेतहाशा बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह फ्यूल (ईंधन) और पावर (बिजली) के दामों में आया उछाल है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर भारत की थोक दरों पर पड़ा है, जहाँ फ्यूल और पावर सेक्टर की महंगाई 1.05% से छलांग लगाकर सीधे 24.71% पर पहुंच गई है।
रोजमर्रा की जरूरतें हुईं महंगी
केवल ईंधन ही नहीं, बल्कि आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों के सामान (प्राइमरी आर्टिकल्स) भी महंगे हुए हैं। इनकी महंगाई दर 6.36% से बढ़कर 9.17% हो गई है। खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़े हैं, जिससे फूड इंडेक्स में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा, मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की महंगाई दर भी 3.39% से बढ़कर 4.62% रही है।
रिटेल महंगाई भी बढ़ी
थोक के साथ-साथ खुदरा (रिटेल) महंगाई (Wholesale Price Index) ने भी आम जनता को झटका दिया है। अप्रैल में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई है, जो मार्च में 3.40% थी। खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई (फूड इन्फ्लेशन) मार्च के 3.87% के मुकाबले अप्रैल में 4.20% पर पहुंच गई है।
आम आदमी पर क्या होगा असर
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि थोक महंगाई लंबे समय तक इसी ऊंचे स्तर पर बनी रही, तो उत्पादक (फैक्ट्री मालिक) अपना बढ़ता खर्च अंततः ग्राहकों से ही वसूलेंगे। इससे आने वाले दिनों में प्लास्टिक, रबर, केमिकल और मेटल से बने सामानों की कीमतों में और इजाफा हो सकता है। सरकार के पास इसे नियंत्रित करने के लिए टैक्स (एक्साइज ड्यूटी) में कटौती का विकल्प होता है, लेकिन इसकी भी एक सीमा है।
महंगाई के आंकड़े एक नजर में Wholesale Price Index
थोक महंगाई (WPI): 8.30% (अप्रैल) 3.88% (मार्च)
ईंधन और बिजली: 24.71% (अप्रैल) 1.05% (मार्च)
प्राइमरी आर्टिकल्स: 9.17% (अप्रैल) 6.36% (मार्च)
रिटेल महंगाई (CPI): 3.48% (अप्रैल) 3.40% (मार्च)



