सीजी भास्कर, 23 मई : देशभर में भीषण गर्मी (Nautapa 2026) का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में तापमान 42 डिग्री के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग ने पहले ही (Heatwave) को लेकर चेतावनी जारी कर दी है। इसी बीच 25 मई से नौतपा (Nautapa 2026) की शुरुआत होने जा रही है, जो 2 जून तक चलेगा। मान्यता है कि इन नौ दिनों में सूर्य की तपिश सबसे अधिक होती है और धरती आग की तरह तपने लगती है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार नौतपा (Nautapa 2026) के दौरान कई राज्यों में भीषण गर्मी, तेज लू और तापमान में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। दोपहर के समय बाहर निकलना लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
क्या होता है नौतपा
‘नौतपा’ (Nautapa 2026) का अर्थ नौ दिनों की तीव्र गर्मी से माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ज्येष्ठ मास में सूर्य जब रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब नौतपा शुरू होता है। इस साल 25 मई को सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। मान्यता है कि इस दौरान सूर्य की किरणें पृथ्वी पर सीधी पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है और भीषण गर्मी महसूस होती है।
कृषि और मानसून से भी जुड़ा है संबंध
नौतपा (Nautapa 2026) को केवल गर्मी से जोड़कर नहीं देखा जाता, बल्कि इसका कृषि और मानसून से भी गहरा संबंध माना जाता है। मान्यता है कि नौतपा जितना अधिक तपता है, मानसून उतना ही बेहतर होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक तेज गर्मी के कारण समुद्र का पानी तेजी से गर्म होता है, जिससे बादल बनने की प्रक्रिया तेज होती है और अच्छी बारिश की संभावना बढ़ जाती है। इससे खरीफ फसलों को फायदा मिलता है।
धार्मिक दृष्टि से भी खास महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं और सूर्य के प्रभाव के कारण इन दिनों गर्मी अधिक महसूस होती है। नौतपा के दौरान सूर्य देव की पूजा और जल अर्पित करने की परंपरा भी है। तांबे के पात्र में जल, गुड़, चावल, रोली और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्पित करना शुभ माना जाता है।
इन बातों का रखें खास ध्यान
नौतपा (Nautapa 2026) के दौरान लोगों को ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जाती है। घर से बाहर निकलते समय सिर ढककर रखें और दोपहर की तेज धूप से बचें। बासी भोजन से परहेज करें और हल्का व ताजा भोजन लें। जरूरतमंदों को शरबत, सत्तू, ठंडा पानी, फल और पंखे दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
इसके अलावा पशु-पक्षियों के लिए पानी और दाने की व्यवस्था करना भी पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नौतपा के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।



