सीजी भास्कर, 25 मई : सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। पार्टी से जुड़े लोगों की गतिविधियों की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई आपातकालीन मामला नजर नहीं आता जिसके लिए तुरंत सुनवाई जरूरी हो।
अदालत में क्या हुई टिप्पणी
यह मामला उस समय चर्चा में आया जब याचिकाकर्ता (Cockroach Janata Party) की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचा रही है।
इस पर प्रधान न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मुद्दे को इतनी भावुकता से नहीं लेना चाहिए। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वीएम पंचोली भी शामिल थे।
याचिका में क्या मांग की गई
याचिका में आंदोलन से जुड़े कथित फर्जी अधिवक्ताओं और कानून की डिग्रियों की जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही अदालत की मौखिक टिप्पणियों के कथित व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर भी कार्रवाई की मांग उठाई गई। याचिका दायर करने वाले पक्ष का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए न्यायपालिका से जुड़ी टिप्पणियों को बड़े स्तर पर प्रचारित किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ा प्रभाव
कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) हाल ही में सोशल मीडिया पर तेजी से उभरी है। इंस्टाग्राम पर पार्टी के फॉलोअर्स की संख्या करोड़ों में पहुंच गई है जबकि अन्य मंचों पर भी इसे लेकर बड़ी चर्चा देखी जा रही है। पार्टी का पुराना अकाउंट बंद होने के बाद नया अकाउंट बनाया गया जिसे फिर से बड़ी संख्या में लोग फॉलो करने लगे।
महाराष्ट्र में बढ़ाई गई सुरक्षा
इस पूरे विवाद के बीच महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में पार्टी से जुड़े अभिजीत दीपके के घर के बाहर पुलिस तैनात की गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सोशल मीडिया पर मुद्दे के तेजी से फैलने के कारण एहतियातन सुरक्षा बढ़ाई गई है ताकि किसी तरह की भीड़ या तनाव की स्थिति न बने। हालांकि पुलिस ने किसी आधिकारिक धमकी की पुष्टि नहीं की है।
वेबसाइट भी हुई बंद
पार्टी से जुड़े लोगों का दावा है कि उनकी वेबसाइट भी बंद हो गई है। बताया गया कि वेबसाइट के जरिए बड़ी संख्या में लोगों ने पंजीकरण कराया था और विभिन्न अभियानों में समर्थन दिया था। फिलहाल वेबसाइट खुल नहीं रही है और तकनीकी संदेश दिखाई दे रहा है।
सोशल मीडिया और न्यायपालिका पर नई बहस
पूरा मामला अब सोशल मीडिया की ताकत अभिव्यक्ति की सीमा और न्यायपालिका से जुड़ी सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर नई बहस का कारण बनता जा रहा है। राजनीतिक और कानूनी हलकों में इस बात पर भी चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में अदालत इस तरह के मामलों को किस नजरिए से देखती है।



