सीजी भास्कर, 25 मई। छत्तीसगढ़ में सड़क पर रहने वाले बच्चों को सुरक्षित भविष्य से जोड़ने के लिए अब बड़ा अभियान शुरू होने (Child Protection) जा रहा है। सरकार ने ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास से जोड़ने की तैयारी तेज कर दी है। इसे लेकर सभी जिलों में प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जारी निर्देशों के बाद अलग अलग विभागों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है। माना जा रहा है कि इस अभियान के जरिए उन बच्चों तक पहुंचने की कोशिश होगी जो सड़क, रेलवे स्टेशन और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षित परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे हैं।
पूरे जून चलेगा विशेष अभियान : Child Protection
बाल सक्षम नीति 2022 के तहत 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे प्रदेश में विशेष सघन अभियान चलाया जाएगा। अभियान के दौरान सड़क पर रहने वाले, भीख मांगने, बाल श्रम और कचरा बीनने जैसे कामों में लगे बच्चों की पहचान की जाएगी। इसके बाद उनका रेस्क्यू कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की कार्रवाई होगी।
बच्चों को मिलेगी शिक्षा और सुरक्षा
विभाग के मुताबिक अभियान का उद्देश्य केवल बच्चों की पहचान करना नहीं बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना भी है। सरकार ने ऐसे बच्चों को किशोर न्याय अधिनियम 2015 और संशोधित नियम 2022 के तहत संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों की श्रेणी में रखा है।
हर जिले में बनेगी रेस्क्यू टीम
जिला कलेक्टरों के नेतृत्व में विशेष रेस्क्यू टीम गठित की जाएगी। वार्ड और संकुल स्तर पर अलग अलग विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
सड़क जैसी परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जाएगा ताकि हर जरूरतमंद बच्चे तक मदद पहुंच सके।
बाल कल्याण समिति करेगी आगे का फैसला
रेस्क्यू किए गए बच्चों को बाल कल्याण समिति के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। वहां उनकी स्थिति के अनुसार पुनर्वास और देखरेख से जुड़े फैसले लिए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर बच्चों को संस्थागत देखभाल, परिवार या रिश्तेदारों के साथ पुनर्स्थापन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
परिवारों को भी योजनाओं से जोड़ा जाएगा
सरकार ने यह भी तय किया है कि बच्चों के परिवारों को अलग अलग शासकीय योजनाओं और आर्थिक सहायता से जोड़ा जाएगा ताकि आर्थिक मजबूरी के कारण बच्चे दोबारा सड़क पर न लौटें। पुनर्वास की प्रक्रिया की लगातार निगरानी जिला स्तर पर की (Child Protection ) जाएगी और बच्चों की जानकारी बाल स्वराज पोर्टल पर अपडेट होती रहेगी।
कई विभाग मिलकर करेंगे काम
अभियान में पुलिस विभाग, श्रम विभाग, रेलवे, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, समाज कल्याण विभाग, पंचायत विभाग, चाइल्ड लाइन और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा।
सरकार ने साफ किया है कि यह केवल एक महीने का अभियान नहीं बल्कि लगातार चलने वाली प्रक्रिया होगी ताकि हर बच्चे को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके।



