सीजी भास्कर, 28 मई : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की हाईटेक निगरानी और सुरक्षा बलों के बड़े अभियान के बीच बस्तर (Bastar Naxal Operation) में अब नक्सलियों के छिपाए गए ‘गुप्त खजाने’ को बाहर निकालने की कार्रवाई तेज हो गई है। सुरक्षा एजेंसियां जंगलों के भीतर जमीन में दबाए गए हथियार, विस्फोटक और करोड़ों रुपये की नकदी खोजने में जुटी हैं।
सूत्रों के मुताबिक नक्सलियों द्वारा जमीन के भीतर छिपाए गए करीब 200 करोड़ रुपये के हथियार, बारूद और कैश की तलाश की जा रही है। पिछले तीन महीनों में सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन के दौरान 8 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के अत्याधुनिक हथियार और नकदी बरामद की है।
ISRO सैटेलाइट और रडार से हो रही निगरानी
इस ऑपरेशन (Bastar Naxal Operation) में इसरो के ‘RISAT-2B’ सैटेलाइट की मदद ली जा रही है। यह सैटेलाइट घने जंगलों के बीच संदिग्ध खुदाई, नई पगडंडियों और जमीन के तापमान में बदलाव को ट्रैक कर डंप लोकेशन का पता लगा रहा है।
इसके अलावा ड्रोन के जरिए थर्मल स्कैनिंग की जा रही है, जबकि बम निरोधक दस्ते ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार और मेटल डिटेक्टर की मदद से जमीन में दबे हथियार और विस्फोटकों को खोज रहे हैं।
नक्सलियों की ‘डंप पॉलिसी’ का खुलासा
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार नक्सली अपनी लेवी वसूली का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा जमीन में गाड़ देते थे। इसके लिए तीन लेयर वाला सुरक्षा घेरा बनाया जाता था। सबसे ऊपर मिट्टी और कांटेदार झाड़ियां, उसके नीचे आईईडी और सबसे नीचे वॉटरप्रूफ प्लास्टिक में पैक हथियार और कैश रखा जाता था।
हाल ही में आत्मसमर्पण (Bastar Naxal Operation) करने वाले एक बड़े नक्सली लीडर के मोबाइल से 22 गुप्त लोकेशन डिकोड की गई हैं, जिसके बाद यह ऑपरेशन और तेज कर दिया गया है।
आखिरी डेटोनेटर तक आपरेशन जारी रहेगा
सुंदरराज पी. ने कहा कि जब तक बस्तर की मिट्टी से आखिरी डेटोनेटर और विस्फोटक नहीं निकाल लिया जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल अब केवल नक्सलियों की मौजूदगी खत्म करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके पूरे आर्थिक और हथियार नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
अब भी बड़ा खतरा बना है ‘गड़ा हुआ नक्सलवाद’
हालांकि बस्तर में नक्सली नेटवर्क काफी कमजोर पड़ चुका है, लेकिन जमीन में दबे विस्फोटक और हथियार अभी भी बड़ा खतरा बने हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन संसाधनों का इस्तेमाल नए युवाओं को संगठन से जोड़ने और भविष्य में हिंसक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। यही वजह है कि अब जंगलों में गड़े हुए नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार किया जा रहा है।




