सीजी भास्कर, 29 मई : कर्नाटक की सियासत में आए भूचाल और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के ऐलान ने छत्तीसगढ़ की राजनीति (Chhattisgarh Congress Governance Power Struggle) में एक बार फिर उस दबे हुए जिन्न को बाहर निकाल दिया है, जिसने पांच साल तक कांग्रेस सरकार की रातों की नींद उड़ाकर रखी थी। सूबे में कांग्रेस शासनकाल के दौरान चला कथित ‘ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला’ और मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर मची रार एक बार फिर छत्तीसगढ़ कांग्रेस गवर्नेंस पावर स्ट्रगल का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बन गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा दिल्ली दरबार को लेकर दिए गए एक बयान के बाद, पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव के सस्पेंस भरे पलटवार और सूबे के कड़क वित्त मंत्री ओपी चौधरी की आक्रामक एंट्री ने छत्तीसगढ़ के सियासी पारे को अचानक सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
कर्नाटक के नेतृत्व परिवर्तन की आंच ने यह साफ कर दिया है कि कांग्रेस के भीतर अंदरूनी खींचतान की जो आग कभी सुलग रही थी, वह आज भी पूरी तरह बुझी नहीं है और नेता अब भी पुराने हिसाब-किताब चुकता करने के मूड में बैठे हैं।
‘हाईकमान ने कभी इस्तीफा नहीं मांगा : Chhattisgarh Congress Governance Power Struggle
कर्नाटक के सियासी घटनाक्रम के बाद जब मीडिया ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को घेरा, तो उन्होंने बेहद आक्रामक तेवर दिखाते हुए खुद का बचाव किया। भूपेश बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के पहले दिन से ही उनसे लगातार यह सवाल पूछा जाता रहा कि क्या वे सिर्फ ढाई साल के मेहमान हैं। उन्होंने कांग्रेस हाईकमान के प्रति अपनी वफादारी का खुलकर प्रदर्शन करते हुए दावा किया।
“मैंने तो पहले दिन ही कह दिया था कि जिस वक्त आलाकमान का फोन आ जाएगा, मैं उसी क्षण अपना इस्तीफा सौंप दूंगा। लेकिन मेरे पूरे पांच साल के कार्यकाल के दौरान हाईकमान की तरफ से ऐसा कोई निर्देश छत्तीसगढ़ कांग्रेस गवर्नेंस पावर स्ट्रगल (Chhattisgarh Congress Governance Power Struggle) को लेकर कभी नहीं आया। पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी सौंपी, मैंने उसे पूरी ईमानदारी से निभाया। असल में भाजपा और विपक्ष ने लगातार पांच साल तक केवल भ्रम फैलाने और हमारी सरकार को अस्थिर दिखाने की नाकाम कोशिश की थी।
Chhattisgarh Congress Governance Power Struggle : बंद कमरे की बातों की मर्यादा रखना राजनीतिक धर्म
भूपेश बघेल के इस बयान की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि कांग्रेस के भीतर उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी रहे पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने अपने चिरपरिचित अंदाज में एक ऐसा सस्पेंस से भरा बयान दाग दिया, जिसने भूपेश के दावों की हवा निकाल दी। सिंहदेव ने बघेल के बयान पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीति में कई बातें बंद कमरों के भीतर तय होती हैं और उन बंद कमरों के फैसलों और चर्चाओं की मर्यादा को बनाए रखना ही हर नेता का असली छत्तीसगढ़ कांग्रेस गवर्नेंस पावर स्ट्रगल (Chhattisgarh Congress Governance Power Struggle) और राजनीतिक दायित्व होता है।
सिंहदेव ने बिना नाम लिए बघेल को आईना दिखाते हुए साफ शब्दों में कहा कि किसे, कब और किस पद की जिम्मेदारी मिलेगी या किससे क्या वादा किया गया था, इसका अंतिम फैसला सिर्फ और सिर्फ हाईकमान ही करता है। सिंहदेव के इस कड़े तेवर ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि बंद कमरे के भीतर ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर क्या खिचड़ी पकी थी, उसका राज आज भी एक गहरा रहस्य बना हुआ है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी का तीखा हमला
कांग्रेस के इस पुराने अंतर्विरोध पर चुटकी लेते हुए और उसे चौतरफा घेरते हुए छत्तीसगढ़ के कड़क वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने करारा पलटवार किया है। ओपी चौधरी ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता बेहद समझदार है और उसने पांच साल तक कांग्रेस के भीतर मची सत्ता की इस नग्न लड़ाई को बहुत करीब से और खुलकर देखा है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पूरी दुनिया गवाह है कि कैसे छत्तीसगढ़ कांग्रेस गवर्नेंस पावर स्ट्रगल (Chhattisgarh Congress Governance Power Struggle) के कारण विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए थे और सरकार के दो बड़े नेता सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने और हथियाने के लिए बार-बार दिल्ली के चक्कर काट रहे थे। वित्त मंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि सत्ता के इस घिनौने संघर्ष और आपस में मची इसी सिरफुटौवल का परिणाम जनता ने चुनाव में दिखा दिया और इसी वजह से कांग्रेस आज सत्ता से पूरी तरह बाहर होकर सड़क पर आ गई है।
कर्नाटक के बहाने छत्तीसगढ़ में फिर खिंचीं तलवारें
दरअसल, यह पूरा मामला केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ कांग्रेस के उस दर्द को कुरेदने जैसा है जहां ढाई साल के कथित वादे के बाद सिंहदेव समर्थक विधायक और खुद सिंहदेव लगातार दिल्ली में अपनी बात रखते रहे थे।
अब जब कर्नाटक में सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद डीके शिवकुमार के लिए रास्ता साफ होने की चर्चाएं हैं, तो छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच की यह नई बयानबाजी छत्तीसगढ़ कांग्रेस गवर्नेंस पावर स्ट्रगल के उस पुराने अध्याय को फिर से खोल रही है, जिसने पार्टी को भारी नुकसान पहुंचाया था।
सत्ता संघर्ष के इस नए दौर ने यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस चाहे सत्ता में रहे या विपक्ष में, उसके शीर्ष नेताओं के बीच की खाई को पाट पाना नामुमकिन है और आने वाले दिनों में यह सियासी जंग और ज्यादा आक्रामक रूप अख्तियार करने वाली है।




