सीजी भास्कर, 30 मई : छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में कानून व्यवस्था, ब्यूरोक्रेसी की अस्मिता और राजनीतिक रसूख को लेकर एक ऐसा अभूतपूर्व और बेहद आक्रामक संग्राम छिड़ गया है, जिसने पूरे प्रदेश के प्रशासनिक महकमे को हिलाकर रख दिया है। राजापुर के नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ हुई कथित बदसलूकी और मारपीट के मामले में घिरे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय विधायक रामकुमार टोप्पो की ‘स्वैच्छिक गिरफ्तारी’ के ड्रामे पर अब सूबे की सियासत सुलग उठी है।
शुक्रवार को जब विधायक अपने भारी-भरकम काफिले के साथ अंबिकापुर आईजी कार्यालय में सरेंडर करने निकले, तो बतौली और मंगारी में उनके ही समर्थकों ने आक्रामक रूप से रास्ता रोक लिया, जिसके बाद विधायक चुपचाप वापस रेस्ट हाउस लौट गए। इस पूरे घटनाक्रम (Surguja Revenue Dispute) ने सरगुजा पुलिस की साख और सुशासन के दावों के पीछे एक गहरा सस्पेंस खड़ा कर दिया है कि आखिर एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आरोपी कानून की गिरफ्त से दूर क्यों हैं।
दरअसल, यह पूरा मामला केवल दो पक्षों की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों के आत्मसम्मान और सत्ता के अहंकार के टकराव की एक बेहद संवेदनशील कहानी है। इस घटना के विरोध में छत्तीसगढ़ कनिष्ठ राजस्व अधिकारी संघ के बैनर तले पूरे प्रदेश के 500 से ज्यादा तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व कर्मी एकमुश्त सामूहिक हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर जमीनों के नामांतरण, बटांकन और राजस्व के कड़े सरकारी काम पूरी तरह ठप हो गए हैं। अधिकारियों के इस अप्रत्याशित कदम (Surguja Revenue Dispute) के बाद अब आम जनता को भारी दिक्कतों और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
थाना बगल में है तो आईजी दफ्तर की नौटंकी क्यों
इस पूरे विवाद में तड़के सुबह उस वक्त और ज्यादा आक्रामक मोड़ आ गया जब प्रदेश के पूर्व मंत्री और कद्दावर कांग्रेस नेता अमरजीत भगत ने इस पूरे सरेंडर कांड को एक सोची-समझी ‘ड्रामेबाजी’ करार दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के राज में कानून का मजाक उड़ाया जा रहा है। अमरजीत भगत ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि अगर विधायक वाकई कानून का सम्मान करते हैं और खुद को बेदाग साबित करना चाहते हैं, तो सरेंडर करने के लिए थाना उनके बगल में ही मौजूद है, फिर लाव-लश्कर लेकर आईजी दफ्तर जाने के पीछे कौन सा हिडन एजेंडा और सस्पेंस छुपा हुआ है?
पूर्व मंत्री ने पुलिस प्रशासन की लाचारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ नामजद आपराधिक मामला दर्ज है, वह पुलिस के सामने खुली चुनौती देते हुए रैलियां निकाल रहा है और कानून पंगु बनकर तमाशा देख रहा है। इस लचर व्यवस्था के ढर्रे में तत्काल बदलाव (Surguja Revenue Dispute) की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि यदि आम आदमी ऐसा करता, तो अब तक पुलिस उसके घर पर बुलडोजर चला चुकी होती।
आधे-अधूरे कागज पर दस्तखत का था दबाव
इस पूरे फसाद की जड़ का असली और सनसनीखेज सस्पेंस खुद पीड़ित नायब तहसीलदार तुषार मानिक और कनिष्ठ राजस्व अधिकारी संघ के प्रांताध्यक्ष कृष्ण कुमार लहरे ने मीडिया के सामने खोला है। उन्होंने बताया कि विधायक और उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए तमाम आरोप पूरी तरह झूठे और मनगढ़ंत हैं। असल कहानी यह है कि जेल में बंद एक हत्या के आरोपी को पैरोल पर बाहर निकालने के लिए गलत तरीके से २५ लाख रुपये का शोध क्षमता प्रमाणपत्र (Solvency Certificate) बनाने का आवेदन दिया गया था। इसके लिए कानूनन ६ एकड़ जमीन का होना अनिवार्य है, लेकिन आवेदिका (जो कि विधायक की बहन बताई जा रही हैं) ने मात्र ३ एकड़ जमीन के पट्टे के साथ आधा-अधूरा आवेदन जमा किया था।
नियम (Surguja Revenue Dispute) के मुताबिक तहसीलदार केवल 5 लाख रुपये तक का ही प्रमाणपत्र जारी कर सकता है। जब नायब तहसीलदार ने इस अवैध और आधे-अधूरे दस्तावेज पर दस्तखत करने से साफ मना कर दिया, तो सत्ता के नशे में चूर होकर अधिकारी के चैंबर में घुसकर उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई। संघ ने दोटूक चेतावनी दी है कि सरकारी अधिकारियों के साथ कार्यस्थल पर होने वाली ऐसी हिंसक वारदात किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम आईजी को ज्ञापन सौंपकर अल्टीमेटम दिया है कि यदि जल्द ही आरोपियों की वास्तविक गिरफ्तारी नहीं हुई, तो पूरे प्रदेश के राजस्व अधिकारी अनिश्चितकालीन आंदोलन की गति (Surguja Revenue Dispute) को तेज करते हुए संपूर्ण काम ठप कर देंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।




