सीजी भास्कर, 01 जून : छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के सीतापुर में उपजे एक बेहद संवेदनशील और गंभीर प्रशासनिक गतिरोध ने अब पूरे प्रदेश (CG Naib Tehsildar Dispute) के भीतर एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। सीतापुर के राजापुर उपतहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिक और स्थानीय भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो के बीच का यह विवाद दिन-ब-दिन और ज्यादा गहराता जा रहा है।
नायब तहसीलदार तुषार मानिक पर जहां एक ओर सीतापुर विधायक की सगी बहन सीमा धनकी से शासकीय कार्यालय में बद्तमीजी और दुर्व्यवहार करने के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं, वहीं दूसरी ओर नायब तहसीलदार द्वारा यह संगीन आरोप लगाया गया है कि सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके उग्र समर्थकों ने उपतहसील कार्यालय के भीतर घुसकर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की है। इस समय दोनों ही पक्षों की शिकायतों पर पुलिस द्वारा क्रास एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।
लेकिन इस बीच, अपनी और पूरे संवर्ग की अस्मिता की लड़ाई लड़ रहे नायब तहसीलदार ने अब शासन के सामने एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी मांग रख दी है। उन्होंने पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए खुद का और विधायक परिवार का नार्को टेस्ट कराने की खुली चुनौती दे दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने पूरे छत्तीसगढ़ में एक बड़े (CG Naib Tehsildar Dispute) को जन्म दे दिया है।
इस पूरे मामले में प्रशासनिक अमला अब पूरी तरह से आर-पार की लड़ाई के मूड में आ चुका है। विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके उन समर्थकों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर आज यानी 1 जून से सरगुजा जिले समेत पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार अनिश्चितकालीन कामबंद और कलमबंद हड़ताल पर चले गए हैं। राजस्व अधिकारियों के इस कड़े फैसले से पूरे प्रदेश की तहसीलों में कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इसी बीच, मीडिया के सामने आकर नायब तहसीलदार तुषार मानिक ने कहा कि सच को सामने लाने के लिए शासन तत्काल नार्को टेस्ट की प्रक्रिया शुरू करे। उनका साफ तौर पर कहना है कि पहले मेरा नार्को टेस्ट कराया जाए, और ठीक उसके बाद माननीय विधायक, उनकी बहन और वहां मौजूद एक अन्य महिला का भी यही टेस्ट हो। उनका मानना है कि इस वैज्ञानिक जांच से दूध का दूध और पानी का पानी पूरी तरह से जनता के सामने आ जाएगा। अधिकारियों के इस रुख से शासन और जनप्रतिनिधियों के बीच का यह (CG Naib Tehsildar Dispute) और ज्यादा उग्र हो गया है।
हम कठिन परीक्षा पास कर अधिकारी बने हैं
नायब तहसीलदार तुषार मानिक ने बेहद भावुक और कड़े लहजे में मीडिया से बातचीत करते हुए घटना वाले दिन की पूरी दास्तां बयां की। उन्होंने बताया कि बीते 27 अप्रैल को विधायक की बहन सीमा धनकी उपतहसील कार्यालय आई थीं और वे ‘शोध क्षमता प्रमाण पत्र’ (सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट) में बिना पूरे जरूरी और वैधानिक दस्तावेज जमा किए ही मुझ पर तुरंत हस्ताक्षर करने का अनुचित दबाव बना रही थीं। अधिकारी ने कहा, “हम दिन-रात एक करके, बेहद कठिन प्रतियोगी परीक्षा पास कर इस सम्मानजनक पद पर पहुंचे हैं। इसके बाद ही कानूनन हमें शासकीय अधिकार और जनता की सेवा करने की जिम्मेदारी मिलती है। मुझ पर जो भी बद्तमीजी के घिनौने आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से झूठे, बेबुनियाद और मनगढ़ंत हैं।”
उन्होंने आगे रोष जताते हुए कहा कि सिर्फ काम न करने की वजह से विधायक और उनके लड़कों द्वारा शासकीय कार्यालय के भीतर आकर मेरे साथ सरेआम मारपीट की गई। यही नहीं, उनके द्वारा मेरे खिलाफ बेहद अपमानजनक और जातिसूचक शब्दों का भी सरेआम इस्तेमाल किया गया, जो एक लोक सेवक के लिए किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। तुषार मानिक ने स्पष्ट किया, “मेरी यह जो न्याय की लड़ाई है, वह अब केवल व्यक्तिगत नहीं रह गई है, बल्कि यह हमारे पूरे प्रांतीय प्रशासनिक संघ की अस्मिता की लड़ाई बन चुकी है। मेरी यह लड़ाई किसी भी तरह से शासन या व्यवस्था से नहीं है, क्योंकि शासन का एक अभिन्न और वफादार अंग मैं भी हूँ और विधायक भी इसी शासन का एक अहम हिस्सा हैं। लेकिन उनके द्वारा एक ऑन-ड्यूटी अधिकारी के साथ जो इस तरह का अमानवीय कृत्य किया गया है, वह सभ्य समाज में कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता।” अधिकारियों के आत्मसम्मान की यह जंग अब प्रदेश में एक बड़े (CG Naib Tehsildar Dispute) के रूप में स्थापित हो चुकी है।
तो लाइव कैमरे के सामने करा लें मेरा नार्को टेस्ट
अपनी ईमानदारी पर लगे दाग को धोने के लिए नायब तहसीलदार ने शासन को खुली चुनौती देते हुए कहा, “मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहता हूँ कि मैंने किसी भी तरह से, किसी भी महिला या विधायक की बहन के सम्मान को तनिक भी ठेस नहीं पहुंचाई है। हमारी संस्कृति में महिलाओं का स्थान सर्वोपरि है। लेकिन अगर फिर भी मुझ पर झूठे आरोप मढ़े जा रहे हैं, तो मेरी शासन से पुरजोर मांग है कि मेरा लाइव नार्को टेस्ट करा लिया जाए, वो भी पूरे मीडिया के कैमरों के सामने करवा लीजिए।”
उन्होंने आगे कहा कि उस टेस्ट में यह साफ हो जाएगा कि मैंने उन्हें धक्का मारा है कि नहीं, या मैंने किसी जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल किया है कि नहीं। जब मेरा टेस्ट पूरा हो जाए, तो उसके तुरंत बाद विधायक, उनकी बहन और उस दूसरी महिला का भी नार्को टेस्ट कराया जाए, जिसने सिर्फ चुनाव के समय राजनीतिक फेवर (लाभ) न करने के कारण दुर्भावनाग्रस्त होकर मुझ पर यह गंभीर आरोप लगाया है। इस पारदर्शी जांच से सच सबके सामने आ जाएगा। अधिकारी की इस बड़ी मांग ने कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में चल रहे इस (CG Naib Tehsildar Dispute) को एक बिल्कुल नया और बेहद दिलचस्प मोड़ दे दिया है।
जब तक विधायक सलाखों के पीछे नहीं जाते
अधिकारी वर्ग ने अब पूरी तरह से साफ कर दिया है कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं। नायब तहसीलदार तुषार मानिक ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि विधायक कानून का सम्मान करते हैं, तो उन्हें खुद आगे आकर सीतापुर थाने में अपनी गिरफ्तारी देनी चाहिए और एक निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस का सहयोग करना चाहिए। उन्होंने अब तक अपनी गिरफ्तारी क्यों नहीं दी, यह रहस्य तो वे ही बेहतर जान सकते हैं। हम प्रशासन से इस पूरे कांड की एक उच्च स्तरीय मजिस्ट्रेट जांच की मांग करते हैं ताकि पर्दे के पीछे का असली सच पूरी दुनिया के सामने आ सके।
उन्होंने अंत में चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक आरोपी विधायक और उनके गुंडों पर वैधानिक और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हमारा यह कामबंद और कलमबंद आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा। यह प्रदर्शन अब केवल सरगुजा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे प्रदेश स्तर से लेकर जिला स्तर और ब्लॉक स्तर तक बहुत बड़े पैमाने पर ले जाया जाएगा। राज्य के सभी कर्मचारी और अधिकारी संगठन हमारे इस न्यायसंगत आंदोलन के समर्थन में पूरी तरह से उठ खड़े हुए हैं। कुल मिलाकर, राजधानी से लेकर वनांचल तक फैला यह (CG Naib Tehsildar Dispute) अब सरकार के लिए एक बहुत बड़ी कानून-व्यवस्था की चुनौती बन चुका है, जिससे निपटना बेहद जरूरी है।




