सीजी भास्कर, 03 जून : बढ़ते जल संकट के बीच जगदलपुर का एक ऐतिहासिक जल स्रोत इन दिनों अपनी बदहाली को लेकर एक बार फिर चर्चा में है। दलपत सागर (Dalpat Sagar Jagdalpur News) के किनारे स्थित 111 वर्ष पुराना यह विशाल कुआं आज प्रशासन की उपेक्षा का शिकार होकर रह गया है। कभी यह ऐतिहासिक कुआं पूरे शहर की प्यास बुझाने का मुख्य जरिया हुआ करता था, लेकिन वर्तमान में इसके रखरखाव और जीर्णोद्धार को लेकर कोई ठोस पहल नजर नहीं आ रही है।
1962 में इंद्रावती योजना आने के बाद थमा उपयोग
दशकों तक शहर की लाइफलाइन रहने के बाद इस कुएं के बुरे दिन वर्ष 1962 से शुरू हुए। साल 1962 में जब इंद्रावती नदी से शहर के लिए नई और विशाल जलापूर्ति व्यवस्था की शुरुआत की गई, तो इस कुएं पर निर्भरता धीरे-धीरे खत्म हो गई और इसका उपयोग बंद कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि आज भी यह कुआं पूरी तरह पानी से लबालब भरा हुआ है, लेकिन सही देखरेख, नियमित सफाई और रखरखाव न होने के कारण यह ऐतिहासिक धरोहर दम तोड़ रही है।
पारंपरिक जल स्रोतों को बचाने की उठी मांग शहर में गहराते जल संकट को देखते हुए अब स्थानीय नागरिकों और जल विशेषज्ञों का गुस्सा भड़क उठा है। स्थानीय लोग लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि इस कुएं की सफाई कराकर इसके पानी का उपयोग निस्तारी (रोजमर्रा के कार्यों) और अन्य जरूरी कामों के लिए दोबारा शुरू किया जाए। जल विशेषज्ञों का भी साफ कहना है कि वाटर लेवल घटने के इस दौर में ऐसे प्राचीन और पारंपरिक जल स्रोतों को सहेजना बेहद जरूरी है। जब कुएं में प्रचुर मात्रा में पानी उपलब्ध है, तो उसे सड़ने के लिए छोड़ने के बजाय उसके संरक्षण की दिशा में कड़क कदम उठाए जाने चाहिए।
खास बातें जो आपको जाननी चाहिए
ऐतिहासिक पहचान: दलपत सागर के तट पर स्थित यह विशाल कुआं करीब 111 साल पुराना है।
पुरानी क्षमता: वर्ष 1916 में बने फिल्टर प्लांट के जरिए इससे 600 घरों को पेयजल मिलता था。
उपेक्षा की वजह: वर्ष 1962 में इंद्रावती नदी परियोजना शुरू होने के बाद से इसका इस्तेमाल बंद हो गया।
नागरिकों की मांग: बढ़ते जल संकट के बीच इस पारंपरिक जल स्रोत को पुनर्जीवित और संरक्षित किया जाए।




