सीजी भास्कर, 04 जून। कर्नाटक की राजनीति में एक नई चर्चा ने जोर पकड़ (Karnataka Congress) लिया है। राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच मुस्लिम समुदाय के धार्मिक नेताओं और उलेमाओं की ओर से उठी मांग ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। इस मुद्दे को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले दिनों में इसका असर राज्य की राजनीति पर दिखाई दे सकता है।
हुबली में आयोजित एक बैठक के दौरान बड़ी संख्या में धार्मिक नेताओं और समुदाय के प्रतिनिधियों ने सरकार में अधिक भागीदारी की मांग उठाई। बैठक में समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी को लेकर कई वक्ताओं ने अपनी राय रखी।
पांच मंत्री पदों की मांग ने बढ़ाई चर्चा : Karnataka Congress
बैठक में मांग की गई कि मुस्लिम समुदाय के पांच वरिष्ठ नेताओं को राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। नेताओं का कहना था कि समुदाय ने चुनाव के दौरान कांग्रेस का समर्थन किया था और अब उसे सरकार में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इस दौरान कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि समुदाय की अपेक्षाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
वरिष्ठ नेताओं के नाम भी आए सामने
बैठक में कई प्रमुख मुस्लिम नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग रखी गई। वक्ताओं का कहना था कि ये नेता लंबे समय से राजनीति और संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं तथा पार्टी के लिए लगातार काम करते रहे हैं। नेताओं ने तर्क दिया कि उनके अनुभव और योगदान को देखते हुए उन्हें सरकार में जिम्मेदारी मिलनी चाहिए।
समुदाय के समर्थन का दिया हवाला
सभा में मौजूद कई वक्ताओं ने कहा कि मुस्लिम समुदाय लगातार कांग्रेस का समर्थन करता रहा है। उनका मानना है कि चुनावी सफलता में समुदाय की भी महत्वपूर्ण भूमिका (Karnataka Congress) रही है। इसी आधार पर उन्होंने सरकार से मंत्रिमंडल में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की मांग दोहराई।
मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
बैठक के दौरान कुछ वक्ताओं ने कड़ा रुख भी अपनाया। उन्होंने कहा कि यदि समुदाय की मांगों पर विचार नहीं किया गया तो राज्यभर में आंदोलन शुरू किया जा सकता है। कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि समुदाय अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चला सकता है।
मंत्रिमंडल विस्तार पर बढ़ी निगाहें
राज्य में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पहले से ही राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे समय में समुदाय की ओर से सामने आई यह मांग सरकार के लिए नई चुनौती मानी जा रही है। अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और आगामी विस्तार में किन नेताओं को मौका मिलता है।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है राजनीतिक गतिविधि
बैठक के बाद यह मुद्दा राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बन (Karnataka Congress) गया है। यदि मांगों को लेकर बातचीत आगे बढ़ती है तो आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। फिलहाल सभी की नजर सरकार और पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर बनी हुई है, क्योंकि यह मामला केवल मंत्रिमंडल विस्तार ही नहीं बल्कि राजनीतिक संतुलन से भी जुड़ा माना जा रहा है।




