सीजी भास्कर, 15 जून। पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहे तनाव को लेकर दुनियाभर की नजरें बनी (US Iran Deal ) हुई थीं। लगातार बढ़ते संघर्ष का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दिया। ऐसे माहौल में सामने आई नई कूटनीतिक पहल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है।
राजनयिक हलकों से लेकर आर्थिक विशेषज्ञों तक, हर कोई इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण मान रहा है। संघर्ष कम होने की संभावनाओं के बीच कई देशों ने राहत की उम्मीद जताई है। इसी बीच भारत की ओर से भी इस समझौते पर सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है।
प्रधानमंत्री ने किया समझौते का स्वागत : US Iran Deal
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने को लेकर बनी सहमति का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस टकराव के कारण दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक अस्थिरता बढ़ी और अनेक देशों को नुकसान उठाना पड़ा।
क्षेत्र में शांति बहाली की उम्मीद
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि इस सहमति को लागू किए जाने से पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी उम्मीद व्यक्त की कि इससे समुद्री आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो सकेंगी।
समझौते को लेकर दोनों देशों का दावा
अमेरिका और ईरान की ओर से संघर्ष समाप्त करने के लिए एक प्रारंभिक समझौते की जानकारी (US Iran Deal) दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार इस व्यवस्था में तत्काल और स्थायी युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने तथा आगे की वार्ताओं के लिए एक ढांचा तैयार करने पर सहमति बनी है। हालांकि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे भी बातचीत जारी रहने की संभावना बताई गई है।
जेनेवा में प्रस्तावित है अगला महत्वपूर्ण कदम
रिपोर्टों के मुताबिक समझौते को औपचारिक रूप देने के लिए स्विट्जरलैंड में उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है। यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है तो दोनों देशों के संबंधों में यह एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ माना जाएगा।
वैश्विक स्तर पर मिल रहा समर्थन
संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं और संगठनों ने इस पहल का स्वागत (US Iran Deal) किया है। इसे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक आर्थिक संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





