सीजी भास्कर, 21 जून : छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल बस्तर जिले ने राजस्व प्रशासन (Bastar Fauti Namantaran Abhiyan) में एक नई कार्यसंस्कृति स्थापित करते हुए सुशासन का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। वर्षों से लंबित पड़े फौती नामांतरण प्रकरणों के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने परंपरागत व्यवस्था से हटकर सक्रिय अभियान चलाया और स्वयं ग्रामीणों तक पहुंचकर भूमि अभिलेखों को अद्यतन करने का कार्य किया। इस पहल ने न केवल हजारों परिवारों को राहत पहुंचाई, बल्कि राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितैषी बनाने का उदाहरण भी प्रस्तुत किया।
फौती नामांतरण की जटिल प्रक्रिया को बनाया सरल
किसी भू-स्वामी की मृत्यु के बाद उसके वारिसों के नाम भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को लंबे समय से जटिल माना जाता रहा है। जानकारी के अभाव, कागजी औपचारिकताओं और बिचौलियों की सक्रियता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मामले वर्षों तक लंबित रहते थे। इससे परिवारों को कानूनी और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था तथा कई बार विवाद भी उत्पन्न होते थे।
बस्तर जिला प्रशासन ने इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए आवेदन आधारित व्यवस्था के स्थान पर स्वयं गांवों तक पहुंचकर लंबित मामलों की पहचान और निराकरण की रणनीति अपनाई।
611 गांवों से जुटाया गया डेटा
विशेष अभियान के तहत जिले के 611 गांवों से जानकारी एकत्रित की गई। 12 जून 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्षों से लंबित फौती नामांतरण प्रकरणों की पहचान कर भूमि अभिलेखों को अद्यतन किया गया। इस अभियान से हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिला है।
ग्राम सचिव, पटवारी और कोटवार बने सफलता की धुरी
अभियान की सफलता के पीछे जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ग्राम सचिवों ने जन्म-मृत्यु अभिलेखों के आधार पर पिछले चार वर्षों में मृत हुए 17,405 व्यक्तियों की सूची तैयार की। जिन परिवारों के पास मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं थे, वहां आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने में भी सहयोग किया गया।
इसके बाद पटवारियों ने भूमि अभिलेखों का परीक्षण कर 8,651 ऐसे मामलों की पहचान की, जिनमें मृत व्यक्तियों के नाम पर भूमि दर्ज थी। वारिसों से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज लिए गए और वंशावली तैयार की गई।
कोटवारों ने गांव स्तर पर सत्यापन कर यह सुनिश्चित किया कि कोई भी फर्जी दावा या त्रुटि प्रक्रिया में शामिल न हो।
8,241 मामलों का हुआ निराकरण
जिले के कुल 8,651 आवश्यक मामलों में से 8,241 प्रकरणों में विधिक प्रक्रिया पूर्ण कर आदेश जारी किए जा चुके हैं। अब केवल 410 मामले लंबित हैं, जिनका निराकरण भी शीघ्र किए जाने की तैयारी है।
तोकापाल और बकावंड रहे सबसे आगे
अभियान के दौरान तोकापाल तहसील में सर्वाधिक 1,553 प्रकरण चिन्हित किए गए, जिनमें से 1,454 का निराकरण किया गया। बकावंड तहसील ने 1,153 में से 1,142 मामलों का समाधान कर लगभग पूर्ण लक्ष्य हासिल कर लिया है। जगदलपुर, बस्तर, भानपुरी, लोहंडीगुड़ा, करपावंड, नानगुर, दरभा और बास्तानार जैसी तहसीलों में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई।
किसानों और आदिवासियों को मिलेगा सीधा लाभ
भूमि अभिलेखों के अद्यतन होने के बाद अब नए भू-स्वामी किसान विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। भूमि संबंधी विवादों में कमी आएगी और किसानों को ऋण, अनुदान तथा अन्य सुविधाएं प्राप्त करने में भी सहूलियत होगी। प्रशासन का मानना है कि इस अभियान ने यह साबित कर दिया है कि संवेदनशील और परिणाम आधारित कार्यशैली अपनाकर कठिन से कठिन प्रशासनिक सुधार भी सफलतापूर्वक लागू किए जा सकते हैं। पहले चरण की सफलता के बाद अब जिला प्रशासन ने अगले चरण की तैयारी शुरू कर दी है। इसके अंतर्गत पिछले दस वर्षों से लंबित फौती नामांतरण प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।





