सीजी भास्कर, 22 जून। कानन पेंडारी जू में इन दिनों एक नन्हा मेहमान आकर्षण का केंद्र बना (Himalayan Goral) हुआ है। वन्य जीव प्रेमियों और जू कर्मचारियों के बीच इसे लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है। लंबे समय से जिस पल का इंतजार किया जा रहा था, वह आखिरकार पूरा हो गया है और अब जू प्रबंधन भी इसे बड़ी उपलब्धि मान रहा है।
पहाड़नुमा रहवास में अपनी मां के साथ उछलकूद करती यह नन्ही सदस्य लोगों का ध्यान खींच रही है। खास बात यह है कि इसके जन्म के साथ ही एक ऐसी उम्मीद फिर जागी है, जिसका इंतजार जू प्रबंधन पिछले एक दशक से कर रहा था।
कानन पेंडारी जू में लगभग 10 साल बाद हिमालयन गोराल प्रजाति के शावक का जन्म हुआ है। इस नई सदस्य के आने से गोराल परिवार की संख्या बढ़कर छह हो गई है। जू प्रबंधन के अनुसार जन्म लेने वाला शावक मादा है और पूरी तरह स्वस्थ है।
वर्ष 2016 में पहली बार लाए गए थे गोराल Himalayan Goral
कानन पेंडारी जू में वर्ष 2016 में पहली बार दिल्ली से तीन हिमालयन गोराल लाए गए थे। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि इनके बीच सफल प्रजनन होगा और संख्या में बढ़ोतरी होगी। हालांकि कई वर्षों तक ऐसा नहीं हो सका। सात साल बीतने के बाद भी जब परिवार नहीं बढ़ा तो वन्य जीवों की अदला बदली प्रक्रिया के तहत वर्ष 2023 में एक जोड़ा और लाया गया। इसके बाद भी लंबे समय तक संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ।
आखिरकार मिली सफलता
जू प्रबंधन लगातार इस प्रजाति के व्यवहार और रहवास पर अध्ययन करता रहा। कुछ समय पहले वर्ष 2023 में लाए गए जोड़े की मादा ने एक शावक को जन्म दिया। इसके साथ ही जू को लंबे इंतजार के बाद बड़ी सफलता मिली है।
नमक रखने का प्रयोग बना मददगार
गोराल के प्रजनन को लेकर जब अपेक्षित परिणाम नहीं मिले तो जू प्रबंधन ने उनके व्यवहार का अध्ययन किया। इस दौरान यह समझने का प्रयास किया गया कि वे अपने कृत्रिम रहवास में अधिकतर ऊंचे हिस्सों पर ही क्यों रहते हैं।
अध्ययन में पाया गया कि प्राकृतिक पहाड़ी क्षेत्रों में उन्हें नमक और खनिज तत्व आसानी से मिलते (Himalayan Goral) हैं। इसके बाद जू के पहाड़नुमा रहवास में उनके भोजन के साथ अलग से नमक उपलब्ध कराया जाने लगा। प्रबंधन का मानना है कि यह उपाय उनके स्वास्थ्य और अनुकूलन के लिए लाभकारी साबित हुआ।
दुर्लभ और फुर्तीला वन्य जीव
हिमालयन गोराल मुख्य रूप से ऊंचे चट्टानी और पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाता है। यह अपनी फुर्ती, तेज गति और कठिन ढलानों पर चढ़ने की क्षमता के लिए जाना जाता है। शरीर का रंग प्राकृतिक वातावरण से मेल खाता है, जिससे यह आसानी से छिप जाता है।
प्रजनन की खासियत
मादा हिमालयन गोराल का गर्भकाल लगभग 170 से 218 दिनों का होता है। सामान्य तौर पर यह एक बार में एक या दो शावकों को जन्म (Himalayan Goral) देती है। जू प्रबंधन को उम्मीद है कि आने वाले समय में इस प्रजाति की संख्या में और वृद्धि देखने को मिल सकती है।





