सीजी भास्कर, 28 जून। छत्तीसगढ़ में सरकारी पैथोलॉजी लैब के निजीकरण (Government Pathology Lab Privatization) की तैयारी के बीच सरकारी अस्पतालों में कार्यरत करीब छह हजार मेडिकल लैब तकनीशियनों (एमएलटी) के भविष्य को लेकर नई स्थिति सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी लैब निजी एजेंसियों के माध्यम से संचालित करने की योजना पर आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही तकनीकी कर्मचारियों को अन्य विभागों में समायोजित करने के विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
6 हजार मेडिकल लैब तकनीशियनों की जिम्मेदारियां बदलने की तैयारी
जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में वर्षों से कार्यरत लगभग छह हजार मेडिकल लैब तकनीशियनों को वैकल्पिक विभागों में भेजने की योजना पर चर्चा चल रही है। सरकारी पैथोलॉजी लैब के निजीकरण (Government Pathology Lab Privatization) के बाद उनकी वर्तमान जिम्मेदारियों में व्यापक बदलाव संभव माना जा रहा है।
आयुष्मान, सीजीएमएससी और फूड एंड ड्रग विभाग में मिल सकती है जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने तकनीशियनों के प्रतिनिधियों से बैठक कर वैकल्पिक पदों को लेकर सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित विकल्पों में आयुष्मान भारत योजना और सीजीएमएससी में कार्यालयीन कार्य, फूड एंड ड्रग विभाग में सैंपल कलेक्शन तथा पंचायत विभाग में प्रशासनिक जिम्मेदारियां शामिल हैं।
तकनीकी कर्मचारियों में बढ़ी चिंता
मेडिकल लैब तकनीशियनों का कहना है कि उन्होंने कठिन प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने और विशेष तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद इस क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल की है। ऐसे में गैर-तकनीकी कार्य सौंपे जाने की संभावना से कर्मचारियों में असमंजस और चिंता का माहौल है। कई तकनीशियन पिछले 15 से 20 वर्षों से सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं।
अभी अंतिम आदेश जारी नहीं
स्वास्थ्य विभाग की ओर से फिलहाल सरकारी पैथोलॉजी लैब के निजीकरण (Government Pathology Lab Privatization) को लेकर कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया है। हालांकि अधिकारियों और तकनीशियन प्रतिनिधियों के बीच हुई चर्चाओं से संकेत मिले हैं कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद तकनीकी स्टाफ की भूमिका में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं।
चरणबद्ध तरीके से लागू होगी नई व्यवस्था
सरकार चरणबद्ध तरीके से सरकारी पैथोलॉजी सेवाओं के निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। शुरुआती चरण में चार जिला अस्पतालों में संचालित ‘हमर लैब’ को बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके बाद अन्य जिला अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी की लैब को भी इस व्यवस्था में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार तकनीशियनों के समायोजन को लेकर विभिन्न विकल्पों पर विचार जारी है। हालांकि अंतिम स्थिति राज्य सरकार के आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।



