सीजी भास्कर, 1 जुलाई। बस्तर पुलिस वेतन घोटाला (Bastar Police Salary Scam) में करोड़ों रुपये के सरकारी धन के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। बस्तर (Bastar) जिला पुलिस कार्यालय की वेतन शाखा में सितंबर 2023 से मई 2026 के बीच कथित तौर पर फर्जी वेतन देयक तैयार कर 3 करोड़ 40 लाख 68 हजार 204 रुपये का अनधिकृत भुगतान किया गया। मामले का खुलासा होने के बाद उप पुलिस अधीक्षक की लिखित शिकायत पर कोतवाली थाना पुलिस ने तीन आरक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
फर्जी वेतन बिल बनाकर सरकारी राशि निकाले जाने का आरोप
पुलिस के अनुसार आरोपी आरक्षक गिरीश राय, हेमंत कुमार और राजकुमार कतलम ने वेतन शाखा में पदस्थ रहते हुए विभागीय पे-रोल सॉफ्टवेयर और सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग किया। आरोप है कि तीनों ने फर्जी वेतन देयक और दस्तावेज तैयार कर वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह किया तथा सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिए।
एआई आधारित जांच में खुला करोड़ों के गबन का राज
बस्तर पुलिस वेतन घोटाला (Bastar Police Salary Scam) का खुलासा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित वित्तीय विश्लेषण के दौरान हुआ। पुलिस मुख्यालय की वित्त शाखा ने बस्तर (Bastar) पुलिस के खर्चों में असामान्य वृद्धि दर्ज होने पर पिछले दस वर्षों के वित्तीय आंकड़ों का एआई से विश्लेषण कराया। जांच में कुछ मदों में खर्च सामान्य से कई गुना अधिक पाया गया, जिसके बाद विशेष जांच शुरू की गई और करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया।
बैंक खाते, ट्रेडिंग अकाउंट और संपत्तियां जांच के दायरे में
मामले की जांच कर रही पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, ट्रेडिंग अकाउंट और अन्य संपत्तियों की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों के अनुसार संदिग्ध खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि गबन की राशि का उपयोग शेयर बाजार में निवेश, अचल संपत्तियां खरीदने या अन्य वित्तीय गतिविधियों में किया गया या नहीं। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
2017 में मिली थी अनुकंपा नियुक्ति, सिस्टम का उठाया कथित फायदा
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी गिरीश राय को वर्ष 2017 में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। वेतन शाखा में लंबे समय तक कार्य करने के दौरान उसने तकनीकी प्रक्रिया और पे-रोल सिस्टम की गहरी जानकारी हासिल कर ली। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी तकनीकी जानकारी का फायदा उठाकर उसने कथित रूप से पूरे सिस्टम पर नियंत्रण बनाया और धीरे-धीरे करोड़ों रुपये के वित्तीय गबन को अंजाम दिया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है और संबंधित दस्तावेजों के साथ वित्तीय लेन-देन की भी गहन पड़ताल की जा रही है।



