सीजी भास्कर, 04 जुलाई : दुर्ग रेंज की साइबर थाना पुलिस ने अंतरराज्यीय ऑनलाइन धोखाधड़ी (Insurance Ombudsman Fraud ) करने वाले एक बेहद शातिर और बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। खुद को ‘बीमा लोकपाल’ (Insurance Ombudsman) का फर्जी अधिकारी बताकर एक पीड़ित से ₹1 करोड़ 60 लाख की भारी-भरकम रकम ऐंठने वाले इस रैकेट के तीन गुर्गों को पुलिस ने देश की राजधानी दिल्ली से धर दबोचा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस ठगी के तार सीधे एक इंटरनेशनल नाइजीरियन साइबर क्राइम नेटवर्क से जुड़े हुए हैं, जो भारत के भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बना रहा है।
रिफंड के नाम पर झांसा
दुर्ग रेंज साइबर पुलिस के मुताबिक, ठगों ने बेहद प्लानिंग के साथ पीड़ित से संपर्क किया था। उन्होंने खुद को इंश्योरेंस लोकपाल विभाग का बड़ा अफसर बताते हुए पीड़ित को झांसे में लिया कि उसकी पुरानी बीमा पॉलिसी का लाखों रुपया सरकारी प्रक्रिया के तहत फंसा हुआ है, जिसे वे रिफंड (वापस) करा देंगे। पीड़ित को पूरी तरह अपने विश्वास में लेने के बाद, आरोपियों ने फाइल चार्ज, एनओसी, टैक्स और अन्य फर्जी सरकारी प्रक्रियाओं का हवाला देकर अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा करवाना शुरू किया। पीड़ित उनके झांसे में आता गया और कई किस्तों में ऑनलाइन माध्यम से कुल 1 करोड़ 60 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब रकम डूबने और ठगी का अहसास हुआ, तब पीड़ित ने साइबर थाने में मामले की शिकायत दर्ज कराई।
टेक्निकल इनपुट से खुला राज
मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग रेंज साइबर टीम ने तकनीकी विंग और बैंक खातों के बारीक लेन-देन (Data Trails) को खंगालना शुरू किया। सबसे पहले पुलिस ने उस मुख्य बैंक खाताधारक को दबोचा जिसके अकाउंट में पैसे गए थे। उससे कड़ाई से पूछताछ के बाद मिले सुरागों के आधार पर दुर्ग पुलिस की एक स्पेशल टीम तुरंत दिल्ली रवाना हुई। दिल्ली में छापेमारी कर पुलिस ने तीन मुख्य आरोपियों—मनमीत सिंह, ईशांत माहे उर्फ ईशु और अमनदीप सिंह को हिरासत में लिया। आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने मोटे कमीशन और पैसों के लालच में अपने नाम पर फर्जी और वैध बैंक खाते खुलवाए थे, जिन्हें वे आगे साइबर ठगों को इस्तेमाल के लिए बेच देते थे। दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में पेश कर पुलिस तीनों को ट्रांजिट रिमांड पर दुर्ग लेकर आई है।
विदेशी ‘नाइजीरियन गैंग’ ऑपरेट कर रहा था भारतीय बैंक खाते अ
तिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP City) सुखनंदन राठौर ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पकड़े गए आरोपी केवल एक जरिया थे, जबकि इस पूरे रैकेट का असली मास्टरमाइंड एक ‘नाइजीरियन साइबर नेटवर्क’ है। ये विदेशी ठग दिल्ली में बैठकर इन भारतीय खातों को इंटरनेट बैंकिंग के जरिए खुद ऑपरेट करते थे और ठगी की रकम आते ही उसे कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर गायब कर देते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 3 महंगे मोबाइल फोन, 6 बैंक पासबुक, 4 चेकबुक और भारी मात्रा में सिम कार्ड बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में इन खातों से करोड़ों रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन की बात सामने आई है और अन्य राज्यों की पुलिस भी इनसे पूछताछ कर सकती है।



