सीजी भास्कर, 04 जुलाई : गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले में प्रशासनिक कसावट और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस (Panchayat Secretary Suspended) की नीति के तहत एक बड़ी दंडात्मक कार्रवाई सामने आई है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं, वित्तीय गड़बड़ियों और घोर अनुशासनहीनता के आरोपों में घिरे ग्राम पंचायत सचिव किशन राठौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। आरोपी सचिव वर्तमान में ग्राम पंचायत तरईगांव में पदस्थ था, जबकि ये गंभीर शिकायतें उसके गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सेमरा में तत्कालीन पदस्थापना के दौरान की हैं। इस कड़े कदम से जिले के भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
बिना नियम-कायदे के ढहा दिया प्राथमिक शाला भवन
जिला पंचायत से जारी आधिकारिक निलंबन आदेश के अनुसार, सचिव किशन राठौर के खिलाफ लंबे समय से गंभीर शिकायतें मिल रही थीं। विभागीय जांच में जो तथ्य सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। सचिव ने नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर शासकीय प्राथमिक शाला भवन (Government Primary School Building) के ध्वस्तीकरण (तोड़फोड़) एवं उसके पुनर्निर्माण कार्य में भारी वित्तीय अनियमितता और नियमों का उल्लंघन किया। इसके साथ ही उस पर शासकीय संपत्ति के खुलेआम दुरुपयोग करने और मनरेगा (MGNREGA) के तहत होने वाले मानव श्रम के कार्यों में अवैध रूप से भारी मशीनों (JCB आदि) का उपयोग करने का गंभीर आरोप भी प्रथम दृष्टया सच और प्रमाणित पाया गया है।
चुनाव और राजनीति में भी था सक्रिय
सचिव किशन राठौर की मनमानी केवल वित्तीय घोटालों तक सीमित नहीं थी। शासकीय सेवा में रहते हुए भी वह खुलेआम राजनीतिक गतिविधियों में संलिप्त पाया गया, जो कि सिविल सेवा आचरण नियमों का सीधा और गंभीर उल्लंघन है। इसके अलावा, उस पर विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने और माननीय न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को ठेंगा दिखाने (न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना) का भी दोष सिद्ध हुआ है।
शो-कॉज नोटिस का गोलमोल जवाब पड़ा भारी
जिला पंचायत सीईओ ने इस पूरे मामले पर सचिव किशन राठौर को पहले ‘कारण बताओ सूचना पत्र’ (Show-Cause Notice) जारी कर अपना पक्ष रखने का समय दिया था। लेकिन सचिव द्वारा प्रस्तुत किया गया स्पष्टीकरण और जवाब पूरी तरह से गोलमोल, अतार्किक और असंतोषजनक पाया गया। इन पुख्ता सबूतों और तथ्यों के आधार पर सीईओ ने छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम, 1999 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए श्री राठौर को सस्पेंड कर दिया है। निलंबन की इस अवधि के दौरान उनका आधिकारिक मुख्यालय जनपद पंचायत मरवाही निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा।



