सीजी भास्कर, 08 जुलाई। छत्तीसगढ़ में सक्रिय मानसून का असर अब प्रदेश के सिंचाई जलाशयों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। लगातार हो रही बारिश के कारण राज्य के प्रमुख और मध्यम जलाशयों में जलभराव की स्थिति लगातार बेहतर हो रही है। जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 12 प्रमुख जलाशयों में जलाशय जलस्तर (Reservoir Water Level) के तहत कुल लाइव स्टोरेज 56.63 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जबकि 34 मध्यम जलाशयों में यह आंकड़ा 42.13 प्रतिशत है।
वर्तमान में राज्य के प्रमुख एवं मध्यम जलाशयों को मिलाकर कुल 54.34 प्रतिशत जल भंडारण उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी बेहतर माना जा रहा है। लगातार हो रही बारिश से सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद भी मजबूत हुई है।
दुधावा, मनियारी और खारंग जलाशय बेहतर स्थिति में
जल संसाधन विभाग के अनुसार प्रमुख जलाशयों में मनियारी जलाशय 76.97 प्रतिशत, दुधावा बांध 72.74 प्रतिशत, खारंग जलाशय 67.10 प्रतिशत तथा सोंढूर जलाशय 65.89 प्रतिशत क्षमता तक भर चुके हैं। प्रदेश के सबसे बड़े मिनीमाता बांगो जलाशय का लाइव स्टोरेज भी बढ़कर 59.42 प्रतिशत पहुंच गया है। वहीं रविशंकर सागर (गंगरेल) जलाशय में 47.66 प्रतिशत, तांदुला जलाशय में 43.93 प्रतिशत तथा सिकासार जलाशय में 41.10 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है।
मध्यम जलाशयों में भी बढ़ा जलभराव
बारिश के कारण मध्यम जलाशयों की स्थिति में भी लगातार सुधार हो रहा है। छिरपानी जलाशय 78.13 प्रतिशत, सूखा नाला बैराज 77.92 प्रतिशत, सुतियापाठ जलाशय 73.28 प्रतिशत तथा पिपरिया नाला जलाशय 70.19 प्रतिशत तक भर चुके हैं।
हालांकि कुछ जलाशयों में अभी भी जलभराव अपेक्षाकृत कम है। इनमें परलकोट, कुम्हारी, केशवा और मयाना जलाशय प्रमुख हैं, जहां आने वाले दिनों में मानसूनी बारिश के चलते जलस्तर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
पिछले वर्ष से कहीं बेहतर स्थिति
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में राज्य के प्रमुख एवं मध्यम जलाशयों में कुल 3456.14 मिलियन घन मीटर पानी संग्रहित है। जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 2084.08 मिलियन घन मीटर था। इससे स्पष्ट है कि इस वर्ष जलाशयों में पानी का भंडारण पिछले साल की तुलना में काफी बेहतर है।
विभाग का कहना है कि यदि मानसून इसी तरह सक्रिय बना रहा तो आने वाले दिनों में जलाशय जलस्तर (Reservoir Water Level) में और बढ़ोतरी होगी। इससे खरीफ फसलों की सिंचाई, पेयजल आपूर्ति तथा जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।



