सीजी भास्कर, 10 जुलाई। रायगढ़ जिले में एक पुराने मामले पर आए अदालत के फैसले ने लोगों का ध्यान फिर से नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों (POCSO Case) की ओर खींचा है। शादी का भरोसा देकर घर से ले जाने और उसके बाद हुए अपराध के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई है। फैसले के बाद न्यायालय परिसर में इस मामले की चर्चा होती रही। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपना निर्णय सुनाया।
घर से निकली थी, वापस नहीं लौटी POCSO Case
मामले के अनुसार जूटमिल थाना क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने 1 अगस्त 2025 को शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी 15 वर्षीय बेटी दोपहर करीब एक बजे सहेली के घर जाने की बात कहकर निकली थी, लेकिन देर शाम तक घर नहीं लौटी। परिजनों ने रिश्तेदारों और परिचितों के यहां उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिलने पर जूटमिल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। शिकायत में नाबालिग को बहला फुसलाकर ले जाने की आशंका जताई गई थी।
बिहार से हुई बरामदगी
जांच के दौरान पुलिस ने 19 अगस्त 2025 को नाबालिग को बिहार के बेगूसराय से बरामद किया। उसके साथ दिलखुश कुमार नाम का 24 वर्षीय युवक भी मिला। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया था और इसी भरोसे पर उसे अपने साथ ले गया। उसने पत्नी बनाने का आश्वासन देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पीड़िता के बयान और जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 87 और 65(1) के साथ पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया। जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया।
अदालत ने सुनाई 20 साल की सजा
मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एवं विशेष पॉक्सो न्यायालय (POCSO Case) में हुई। दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्य देखने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर 7 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने पैरवी की।



