सीजी भास्कर, 6 सितंबर : बिजली उत्पादन ठप (NTPC Korba Breakdown) होने के करीब 20 घंटे बाद एनटीपीसी जमनीपाली कोरबा की सात में से तीन यूनिट से दोबारा उत्पादन शुरू हो गया है। शनिवार दोपहर करीब 2 बजे तीन इकाइयों को चालू किया गया। बाकी चार यूनिट को भी सुरक्षा मानकों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत क्रमवार शुरू करने का प्रयास जारी है।
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बे-ब्रेकर की टेस्टिंग के दौरान हुआ बड़ा फॉल्ट
शुक्रवार शाम करीब 6 बजे पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की टीम बे-ब्रेकर की टेस्टिंग कर रही थी। इसी दौरान इलेक्ट्रिकल फॉल्ट हो गया। इसका असर इतना व्यापक था कि एनटीपीसी की सभी सात यूनिट एक साथ बंद हो गईं।
बिजली उत्पादन ठप (NTPC Korba Breakdown) होने से 2600 मेगावाट क्षमता वाले संयंत्र में उत्पादन पूरी तरह रुक गया। एक साथ सभी इकाइयों के बंद होने से ग्रिड पर दबाव बढ़ गया। इसका असर गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गोवा तक भी पड़ा।
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500-500 मेगावाट की दो यूनिट फिर चालू
एनटीपीसी की जनसंपर्क अधिकारी उष्मा घोष के अनुसार तीन इकाइयों को दोबारा चालू कर दिया गया है। इनमें दो 500-500 मेगावाट की इकाइयां और एक 200 मेगावाट की इकाई शामिल है।
बाकी चार इकाइयों को भी चरणबद्ध तरीके से शुरू करने का काम जारी है। फिलहाल इनके उत्पादन में आने का निश्चित समय नहीं बताया गया है। बिजली उत्पादन ठप (NTPC Korba Breakdown) होने के बाद संयंत्र को सामान्य स्थिति में लाने के लिए तकनीकी टीम लगातार काम कर रही है।
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150 करोड़ से ज्यादा नुकसान की आशंका
सातों यूनिट से एक साथ उत्पादन बंद होने के कारण 150 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस नुकसान को लेकर एनटीपीसी प्रबंधन की ओर से अभी कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।
उत्पादन पूरी तरह सामान्य नहीं होने के कारण नुकसान का अंतिम आकलन भी फिलहाल सामने नहीं आया है। बिजली उत्पादन ठप (NTPC Korba Breakdown) रहने से संयंत्र की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर भी असर पड़ा है।
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दूसरे ग्रिड से जोड़ी गई बिजली आपूर्ति
एनटीपीसी के जरिए बिजली की आपूर्ति पावर ग्रिड के माध्यम से दूसरे राज्यों तक की जाती है। कोरबा संयंत्र में उत्पादन बंद होने के बाद वैकल्पिक स्रोतों से बिजली आपूर्ति को बनाए रखने का प्रयास किया गया।
फॉल्ट के बाद पावर ग्रिड कॉरपोरेशन की टीम बे-ब्रेकर की जांच और टेस्टिंग में जुटी है। तकनीकी खराबी के कारणों का विस्तृत आकलन किया जा रहा है।
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2011 में भी बन चुकी है ऐसी स्थिति
एनटीपीसी कोरबा में एक साथ सभी यूनिट बंद होने के कारण ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन गई थी। ऐसी स्थिति वर्ष 2011 में भी सामने आ चुकी है।
एनटीपीसी कोरबा की कुल उत्पादन क्षमता 2600 मेगावाट है। छत्तीसगढ़ में एनटीपीसी की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 7180 मेगावाट बताई गई है। बिजली उत्पादन ठप (NTPC Korba Breakdown) के बाद अब चार बंद यूनिटों को जल्द से जल्द शुरू करना प्रबंधन की प्राथमिकता है।
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छत्तीसगढ़ में NTPC के तीन बड़े प्लांट
एनटीपीसी कोरबा संयंत्र की स्थापना वर्ष 1978 में जर्मनी की सहायता से की गई थी। इसकी उत्पादन क्षमता 2600 मेगावाट है।
छत्तीसगढ़ में एनटीपीसी का दूसरा बड़ा संयंत्र सीपत, बिलासपुर में है। इसकी क्षमता 2980 मेगावाट है। वहीं लारा, रायगढ़ संयंत्र में पहले चरण से 1800 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। यहां दूसरे चरण का काम जारी है।




