सीजी भास्कर, 9 सितंबर : नेपाल में बाढ़ (Nepal Flood) की तबाही अभी पूरी तरह थमी भी नहीं है कि मौसम ने एक बार फिर आफत का खतरा बढ़ा दिया है। बुधवार को कई हिस्सों में तेज बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और बिजली चमकने की भी आशंका है। ऐसे में पहले से बाढ़ से प्रभावित नेपाल के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
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कई इलाकों में भारी बारिश
मौसम विभाग ने भारी बारिश का अलर्ट (Nepal Flood) कई इलाकों के लिए जारी किया है। मधेश, कोशी, बागमती, गंडकी और लुंबिनी के कई हिस्सों में तेज बारिश होने की संभावना है। पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में मौसम खराब रह सकता है।
कोशी, बागमती और गंडकी के ऊंचे इलाकों में बारिश के साथ बिजली चमकने की आशंका है। यहां बर्फबारी भी हो सकती है। लुंबिनी और कर्णाली के कुछ पहाड़ी हिस्सों में भी बर्फ गिरने की संभावना जताई गई है।
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बाढ़ में हजारों प्रभावित
नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ की तबाही (Nepal Flood) से अब तक 1,377 लोगों की मौत बताई गई है। 5,326 लोग अभी भी लापता हैं, जबकि 6,827 लोग घायल हुए हैं। बाढ़ से 7,570 घर टूट गए या क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस आपदा के कारण हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। कई परिवारों ने अपने घर खो दिए हैं। सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
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चीन कारोबार पर असर
बाढ़ का असर चीन सीमा के व्यापार मार्ग (Nepal Flood) पर भी पड़ा है। रसुवागढ़ी और तातोपानी बॉर्डर के रास्ते प्रभावित होने से करीब 500 से 600 कंटेनर फंसे हुए हैं। 200 से ज्यादा नेपाली कंटेनर बाढ़ में बह चुके हैं। करीब 176 ट्रकों को कोराला मार्ग से भेजने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इस रास्ते से सामान पहुंचने में 10 से 12 दिन तक लग रहे हैं। इससे नेपाल-चीन व्यापार भी प्रभावित हुआ है।
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4 लाख करोड़ से ज्यादा नुकसान
बाढ़ से नेपाल को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। बाढ़ से हुआ आर्थिक नुकसान (Nepal Flood) 4 लाख करोड़ नेपाली रुपये से अधिक बताया गया है। इसमें घर, सड़क और सरकारी व निजी संपत्तियों को हुआ नुकसान शामिल है। पूरी जांच और आकलन के बाद नुकसान का आंकड़ा करीब 30 प्रतिशत तक और बढ़ने की आशंका है। सरकार का अनुमान है कि देश को दोबारा खड़ा करने और क्षतिग्रस्त ढांचे की मरम्मत के लिए 4 से 5 अरब डॉलर तक की जरूरत पड़ सकती है।
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पुनर्निर्माण के लिए मदद
नेपाल सरकार राहत और पुनर्निर्माण कार्य (Nepal Flood) के लिए दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मदद मांग रही है। सरकार के सामने एक साथ राहत, पुनर्वास और बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने की चुनौती है। वहीं नए मौसम अलर्ट ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। प्रभावित क्षेत्रों में मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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