सीजी भास्कर, 22 मई। छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावशाली एवं संतुलित बनाने के लिए एक महत्त्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है। शिक्षा विभाग ने राज्य भर के स्कूलों में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया लागू कर दी है, जिसका उद्देश्य (Teacher Rationalization In CG) के ज़रिए छात्र-शिक्षक अनुपात को संतुलित करना और शिक्षकों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।
यह प्रक्रिया न केवल स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाएगी, बल्कि बच्चों को लगातार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में मददगार होगी। साथ ही, बेहतर भौतिक संसाधनों का उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
राज्य की शिक्षा की वर्तमान स्थिति (Teacher Rationalization In CG)
राज्य में 30,700 प्राथमिक शालाएं और 13,149 पूर्व माध्यमिक शालाएं संचालित हैं। प्राथमिक स्तर पर औसतन 21.84 और पूर्व माध्यमिक स्तर पर 26.2 छात्र प्रति शिक्षक हैं, जो कि राष्ट्रीय औसत से बेहतर है।
फिर भी चुनौतियां बनी हुई हैं – 212 प्राथमिक स्कूल पूर्णतः शिक्षकविहीन हैं और 6,872 स्कूलों में केवल एक शिक्षक पदस्थ हैं। 362 स्कूल ऐसे भी हैं जहां शिक्षक तो हैं लेकिन छात्र नहीं। शहरी क्षेत्रों में 245 स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात 40 से अधिक है, जबकि कई स्कूलों में शिक्षक अधिक और छात्र कम हैं। (Chhattisgarh school reform plan) का लक्ष्य इन असंतुलनों को दूर करना है।
युक्तियुक्तकरण के संभावित लाभ (Teacher Rationalization In CG)
इस प्रक्रिया के तहत ऐसे स्कूलों से जहां शिक्षक अधिक और छात्र कम हैं, शिक्षकों को उन स्थानों पर भेजा जाएगा जहां उनकी आवश्यकता अधिक है। इससे शिक्षकविहीन और एकल शिक्षक स्कूलों की समस्या खत्म होगी।
साथ ही, एक ही परिसर में प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी तक की कक्षाएं संचालित होने से छात्रों को एडमिशन की परेशानी नहीं होगी। पढ़ाई में निरंतरता बनी रहेगी और ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी। बिल्डिंग, लैब, लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं एक ही जगह मिलने से बच्चों का शैक्षिक अनुभव समृद्ध होगा। (rationalization policy in CG education) से बच्चों और शिक्षकों दोनों को लाभ मिलेगा।




