सीजी भास्कर, 4 अगस्त 2025 : छत्तीसगढ़ के कोरबा वन मंडल के पसरखेत रेंज अंतर्गत बगधरीडांड के जंगल में एक दो दिन के नवजात हाथी की मौत हो गई। बताया गया कि जन्म के समय भारी बारिश और कीचड़भरे इलाके के कारण नवजात को निमोनिया हो गया था। उसे बचाने के लिए वन विभाग ने पूरी कोशिश की, लेकिन असफल रहा। बच्चे को जंगल में ही दफनाया गया है।
तीन दिन पहले भी इसी क्षेत्र में करंट लगने से एक वयस्क हाथी की मौत हुई थी। फिलहाल इस इलाके में 35 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। बगधरीडांड के पास लगातार हथिनी के चिंघाड़ने की आवाजें सुनाई दे रही थीं, जिससे वनकर्मियों को प्रसव का अंदेशा हुआ।
ग्रामीणों को जंगल में प्रवेश न करने के लिए मुनादी कराई गई। अगले दिन जब दल मौके पर पहुंचा तो देखा गया कि हथिनी ने नवजात को जन्म दिया था। वह उसे कीचड़ से उठाने की बार-बार कोशिश कर रही थी, लेकिन बच्चा बहुत कमजोर था और उठ नहीं पा रहा था।
बच्चे की स्थिति देखकर कानन पेंडारी, बिलासपुर से वन्यजीव चिकित्सक डॉ. पी.के. चंदन को बुलाया गया। ड्रोन कैमरे की मदद से बच्चे की निगरानी की गई। रेस्क्यू टीम ने उपचार के लिए पास जाने की कोशिश की, लेकिन हथिनी आक्रामक व्यवहार कर रही थी और अपने बच्चे के पास किसी को नहीं जाने दे रही थी। अंधेरा होने की वजह से टीम को वापस लौटना पड़ा।
रविवार सुबह हथिनी कुछ दूरी पर चली गई, तब टीम मौके पर पहुंची। उस समय तक नवजात में सांस चल रही थी। वनमंडलाधिकारी कुमार निशांत ने बताया कि तत्काल जीवन रक्षक घोल देकर इलाज शुरू किया गया, लेकिन अत्यधिक ठंड और फेफड़ों में म्यूकस भरने की वजह से नवजात ने दम तोड़ दिया। बताया गया कि हाथियों के इस दल में चार छोटे बच्चे हैं।





