सीजी भास्कर, 27 अगस्त : छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की कैबिनेट में 14वें मंत्री की शपथ को लेकर कांग्रेस ने बड़ा मोर्चा खोल दिया है। संविधान के अनुच्छेद 164(1क) का हवाला देते हुए कांग्रेस इस नियुक्ति को असंवैधानिक बता रही है और अब (Chhattisgarh Cabinet Dispute) हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज पहले ही इस नियुक्ति पर आपत्ति जता चुके हैं। भूपेश बघेल ने बिलासपुर हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकीलों से चर्चा की और कानूनी विकल्पों पर मंथन किया। इसके साथ ही पूर्व विधि मंत्री मोहम्मद अकबर से भी राय-मशविरा किया गया है। कांग्रेस जल्द ही याचिका दाखिल कर सकती है, हालांकि यह अभी तय नहीं है कि याचिकाकर्ता कोई विधायक होगा या कोई सामाजिक कार्यकर्ता।
भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि यदि केंद्र सरकार से अनुमति ली गई है, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? गजट नोटिफिकेशन कहां है? उन्होंने चेतावनी दी कि बिना वैधानिक अनुमति के मंत्री बनाए जाना संविधान का उल्लंघन है और यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक परंपरा की शुरुआत होगी।
इसी बीच, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्यपाल को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कुल 90 सीटों के हिसाब से मंत्रियों की अधिकतम संख्या 13.50 यानी 13 होनी चाहिए। लेकिन वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित 14 मंत्री हैं, जो सीधे-सीधे संविधान का उल्लंघन है। उन्होंने एक मंत्री को तत्काल हटाने की मांग की। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यह परंपरा तोड़ने वाला फैसला है, जिससे भाजपा सरकार के भीतर अंतर्कलह और भी तेज होगी। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी। अब (Chhattisgarh Cabinet Dispute) पर सभी की निगाहें हाईकोर्ट पर टिकी हैं कि वह इस संवैधानिक चुनौती को किस तरह से देखता है। दूसरी ओर, भाजपा के लिए यह एक बड़ी कानूनी और राजनीतिक परीक्षा बनकर सामने आ रही है। विपक्ष लगातार हमलावर है और इस विवाद को जनता के बीच ले जाकर भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
क्या है अनुच्छेद 164(1 क)
संविधान का अनुच्छेद 164 (1क) कहता है कि किसी राज्य की मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती, लेकिन यह संख्या 12 से कम भी नहीं होगी। छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 सदस्य हैं, ऐसे में मंत्रियों की संख्या अधिकतम 13 हो सकती है। वर्तमान में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत 14 मंत्री होने पर विपक्ष इसे संविधान का सीधा उल्लंघन मान रहा है।