सीजी भास्कर 28 अगस्त
आइज़ोल। मिजोरम विधानसभा ने बुधवार को ‘मिजोरम प्रोहिबिशन ऑफ बेग्गरी बिल, 2025’ पास कर दिया। इस कानून का उद्देश्य सिर्फ भीख मांगने पर रोक लगाना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को पुनर्वास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है।
भिखारियों की मदद के लिए बनेगा राहत बोर्ड
सोशल वेलफेयर मंत्री लालरिनपुई ने बताया कि वर्तमान में मिजोरम में भिखारियों की संख्या बेहद कम है। इसका कारण राज्य का मजबूत सामाजिक ढांचा, चर्च और एनजीओ की सक्रियता तथा सरकारी योजनाएं हैं।
हालांकि, सैरांग-सिहमुई रेल लाइन के शुरू होने के बाद बाहर से भिखारियों के आने की संभावना बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
नए कानून के तहत एक राहत बोर्ड और रिसीविंग सेंटर बनाए जाएंगे, जहां पकड़े गए भिखारियों को अस्थायी रूप से रखा जाएगा। 24 घंटे के भीतर उन्हें उनके घर या राज्य वापस भेज दिया जाएगा।
विपक्ष ने जताई आपत्ति
सोशल वेलफेयर विभाग के सर्वे में पाया गया कि फिलहाल राजधानी आइज़ोल में 30 से अधिक भिखारी मौजूद हैं, जिनमें कई बाहर से आए हैं।
बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी नेता लालचंदामा राल्ते ने कहा कि यह कानून राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है और मसीही मूल्यों के खिलाफ है।
उन्होंने सुझाव दिया कि भिखारियों की मदद के लिए चर्च और समाज की भागीदारी और मज़बूत की जानी चाहिए।
सरकार का लक्ष्य: भिक्षावृत्ति-मुक्त मिजोरम
मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने स्पष्ट किया कि इस कानून का मकसद सज़ा देना नहीं है। इसके जरिए चर्च, एनजीओ और सरकार मिलकर भिखारियों का पुनर्वास करेंगे, ताकि मिजोरम को पूरी तरह भिक्षावृत्ति-मुक्त राज्य बनाया जा सके।