सीजी भास्कर, 30 अगस्त |
बिलासपुर।
रेलवे कोचिंग डिपो में काम कर रहे एक ठेका मजदूर की करंट लगने से मौत के बाद बिलासपुर में तनावपूर्ण माहौल बन गया है। मृतक प्रताप बर्मन के परिजन और समाज के लोगों ने DRM ऑफिस के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। आंदोलनकारी परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा, पत्नी को सरकारी नौकरी और बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की मांग कर रहे हैं।
हादसे के बाद जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा
मजदूर की मौत के बाद रेलवे प्रशासन और ठेकेदार ने खुद को जिम्मेदारी से अलग कर लिया। इससे गुस्साए परिजनों ने लगातार तीसरे दिन तक प्रदर्शन जारी रखा। रेलवे अफसरों ने साफ कहा कि ठेका श्रमिकों के लिए सीधी मदद का कोई प्रावधान नहीं है।
इलाज के दौरान मौत और उग्र हुआ आंदोलन
गुरुवार सुबह इलाज के दौरान प्रताप बर्मन की मौत हो गई। इसके बाद परिजन पहले अस्पताल में और फिर DRM ऑफिस के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने वहीं रात बिताई और शुक्रवार को भंडारा आयोजित कर आंदोलन जारी रखा।
शव को लेकर भी विवाद
शव को लेकर भी प्रशासन और परिजनों में तनाव की स्थिति बनी रही। पोस्टमार्टम शुक्रवार दोपहर को हुआ, लेकिन शव सौंपने से पहले पुलिस ने कहा कि उसे सीधे गांव तक ले जाया जाएगा। इस पर परिजन भड़क उठे और काठी में मृतक की तस्वीर रखकर प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाल दी।
बढ़ता आंदोलन, सामाजिक संगठनों की एंट्री
आंदोलन को समर्थन देने के लिए भीम आर्मी और बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता भी शामिल हो गए। जिला अस्पताल से लेकर DRM ऑफिस तक जमकर नारेबाजी होती रही।
प्रशासन का प्रस्ताव और परिजनों का इंकार
देर शाम अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत की।
- रेलवे की ओर से 16 लाख रुपये (श्रम न्यायालय के आदेश पर) और
- राज्य सरकार की ओर से 5 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की गई।
लेकिन मृतक की पत्नी ने इसे अस्वीकार करते हुए साफ कहा कि परिवार को एक करोड़ मुआवजा, सरकारी नौकरी और बच्चों की पढ़ाई की गारंटी चाहिए।
मृतक के बड़े भाई पंकज ने अफसरों को प्रताप की तस्वीर दिखाकर कहा – “अगर हमारी मांगें नहीं मानी जातीं तो आप सब वापस लौट जाइए।”