सीजी भास्कर 2 सितम्बर
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शिक्षण क्षेत्र से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि शिक्षण सेवा में बने रहने या प्रमोशन पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना जरूरी होगा।
यह फैसला अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में सुनाया गया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि यह नियम सभी शिक्षकों पर समान रूप से लागू होगा।पांच साल से कम सेवा वाले शिक्षकों को राहत
पीठ ने उन शिक्षकों को राहत दी है, जिनकी सेवानिवृत्ति में केवल 5 साल शेष हैं। ऐसे शिक्षक बिना TET पास किए अपनी सेवा अवधि पूरी कर सकते हैं।
हालांकि, जिनकी सेवा अवधि 5 साल से अधिक बची है, उन्हें अनिवार्य रूप से TET पास करना होगा। अन्यथा उन्हें सेवांत लाभों के साथ अनिवार्य सेवानिवृत्ति का विकल्प चुनना पड़ेगा।अल्पसंख्यक संस्थानों पर भी लागू होगा नियम
मामले में सवाल यह था कि क्या अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों पर भी TET की शर्त लागू होगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह शर्त सभी संस्थानों पर समान रूप से लागू होगी, क्योंकि यह शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ा विषय है।NCTE ने तय की थी न्यूनतम योग्यता
गौरतलब है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने वर्ष 2010 में पहली बार कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यताएं तय की थीं। इसके तहत TET को अनिवार्य किया गया था।
तमिलनाडु सरकार की याचिका पर भी सुनवाई
इसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर भी सुनवाई करने की सहमति जताई, जिसमें मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने 10 जून को शिक्षा सत्र 2024-25 के लिए RTE अधिनियम के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था और गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को प्रतिपूर्ति की बात कही थी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले पर केंद्र और याचिकाकर्ता से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद होगी।



