सीजी भास्कर, 19 सितंबर। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डिवेलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है। आने वाली 1 अक्टूबर 2025 से लागू होने वाले इस बदलाव से लाखों पेंशनधारकों और निवेशकों को राहत मिलेगी। अब गैर-सरकारी सब्सक्राइबर अपनी पूरी पेंशन राशि को 100% इक्विटी यानी शेयर बाजार से जुड़ी योजनाओं में निवेश कर सकेंगे। अब तक यह सीमा 75% तक सीमित थी। नए बदलाव के बाद पेंशन निवेशकों को ज्यादा विकल्प और लचीलापन मिलेगा। यह फैसला पेंशन प्रणाली (NPS Rule Change) को और आकर्षक और आधुनिक बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
अब एक से ज्यादा योजनाओं में निवेश का मौका
पहले NPS में निवेशक को केवल एक ही स्कीम चुननी पड़ती थी। चाहे वह टियर-1 हो या टियर-2 खाता। उन्हें ऑटोचॉइस या एक्टिवचॉइस मॉडल में से एक विकल्प लेना पड़ता था और पूरी राशि उसी में निवेश करनी पड़ती थी। लेकिन अब मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) लागू होने जा रहा है। इसके तहत निवेशक अपनी राशि को अलग-अलग योजनाओं में बांट सकेंगे। यानी, कोई युवा निवेशक चाहें तो पूरी रकम इक्विटी (NPS Rule Change) में लगाकर ज्यादा रिटर्न कमा सकता है। वहीं, कम जोखिम चाहने वाले लोग डेब्ट फंड और बैलेंस्ड फंड में बड़ा हिस्सा डालकर सुरक्षा को प्राथमिकता दे सकते हैं।
उम्र सीमा भी हुई लचीली
पहले NPS में निवेश की अधिकतम उम्र 60 साल थी। लेकिन अब इसे और लचीला बनाया गया है। नए नियम के अनुसार निवेशक चाहे तो 50 या 55 साल की उम्र में ही अपनी पेंशन राशि निकाल सकते हैं। वहीं, जो निवेश जारी रखना चाहते हैं, वे 60 से 75 साल की उम्र तक भी योगदान कर सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि पेंशन योजना (NPS Rule Change) अब सेल्फ-एम्प्लॉयड और कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने वालों के लिए भी ज्यादा फायदेमंद साबित होगी।
निवेशकों को मिलेगा फायदा
HDFC पेंशन फंड के एमडी और सीईओ श्रीराम अय्यर का कहना है कि 100% इक्विटी निवेश का विकल्प और 15 साल बाद पैसा निकालने की सुविधा खासतौर पर युवा निवेशकों के लिए बड़ा अवसर है। उनका मानना है कि यह नया ढांचा पेंशन निवेश (NPS Rule Change) को रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए और भी आकर्षक बना देगा। उन्होंने कहा कि अब निवेशक अपनी उम्र, जोखिम उठाने की क्षमता और जरूरत के मुताबिक निवेश की सही रणनीति बना सकेंगे।
सुरक्षा और पारदर्शिता पहले जैसी
हालांकि नए बदलाव से निवेशकों को अधिक विकल्प मिलेंगे, लेकिन सुरक्षा से जुड़े नियम पहले जैसे ही रहेंगे। जब भी निवेशक अपनी रकम निकालेंगे, तो कुल राशि का कम से कम 40% हिस्सा अन्युटी (annuity) में लगाना अनिवार्य होगा। इससे उन्हें रिटायरमेंट के बाद तय मासिक या सालाना आय मिलती रहेगी। इसके अलावा, पेंशन खाता (NPS Rule Change) पूरी तरह पोर्टेबल रहेगा। यानी निवेशक किसी भी समय अपना खाता दूसरे पेंशन फंड मैनेजर के पास ट्रांसफर कर सकते हैं।


