सीजी भास्कर, 24 सितंबर। राजधानी रायपुर के महादेव घाट क्षेत्र से इतिहास की नई परतें सामने आ रही हैं। मार्च के अंतिम सप्ताह में गिरिजा शंकर स्कूल (Raipur Mahadev Ghat Excavation) के पीछे एक निजी भूमि को समतल करने के दौरान करीब 2,100 साल पुराने अवशेष मिलने का दावा किया गया है। खुदाई के दौरान लोहे के औजार, सिल-बट्टा, प्राचीन पत्थर और मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े बाहर आए।
हालांकि, छह महीने बीतने के बाद भी पुरातत्व विभाग ने विस्तृत खुदाई शुरू करने के लिए शासन को कोई ठोस प्रस्ताव नहीं भेजा है। इससे यह आशंका गहरी हो रही है कि कहीं रायपुर का यह अनमोल इतिहास समय और दबाव की परतों में दब न जाए।
जमीन के नीचे छिपी हो सकती है प्राचीन बस्ती
भूमि समतल करते समय डेढ़ से दो फीट की गहराई पर ये वस्तुएं मिलीं। इसके बाद पुरातत्व विभाग ने विशेषज्ञों की टीम भेजी और पांच सदस्यीय समिति का गठन कर पूरे क्षेत्र का सर्वे कराया। रिपोर्ट में कहा गया कि करीब 30 फीट नीचे महल, किले और अन्य संरचनाओं के अवशेष मौजूद हो सकते हैं। यही कारण है कि प्रशासन (Raipur Mahadev Ghat Excavation) ने इस इलाके को संरक्षित घोषित कर दिया है और निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र कभी खारुन नदी किनारे बसी एक प्राचीन बस्ती रहा होगा। शुरुआती अध्ययन में इसे कलचुरी काल यानी 1,000 साल पुराना माना गया था, लेकिन अब अनुमान है कि स्थल की उम्र 2,100 साल से भी अधिक हो सकती है।
जमीन को लेकर खींचतान
पुरातत्व विभाग ने इस 36 एकड़ भूमि को अपने अधीन करने की मांग की है ताकि व्यवस्थित खुदाई और अनुसंधान (Raipur Mahadev Ghat Excavation) किया जा सके। लेकिन जमीन मालिक निर्माण कार्य शुरू करने के पक्ष में हैं। सूत्रों के अनुसार, वे शासन से अनुमति प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे धरोहर पर संकट मंडराने लगा है।
विशेषज्ञ का बयान
प्रताप पारख, उप संचालक, पुरातत्व विभाग ने कहा:- “महादेव घाट इलाके में प्राचीन इतिहास की परतें उजागर हो रही हैं। शुरुआती जांच के आधार पर यह स्थल लगभग 2,100 वर्ष पुराना हो सकता है। आगे की खुदाई में और भी महत्वपूर्ण अवशेष सामने आ सकते हैं, जिससे इसकी ऐतिहासिक महत्ता और गहरी हो जाएगी।”



