राजस्थान में Bribery Case in Rajasthan से जुड़ा एक चौंकाने वाला फैसला सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक अदालत ने बिजली निगम के जूनियर क्लर्क भरतलाल जैन को 16 साल पुराने मामले में दोषी करार दिया है। कोर्ट ने उसे एक साल की सजा और 20 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
2009 में मांगी थी रिश्वत
यह मामला वर्ष 2009 का है। डूंगरपुर जिले के रहने वाले लोकेश मेहता ने बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। निर्धारित राशि 2910 रुपये जमा कराने के बाद भी उन्हें कनेक्शन नहीं मिला। इस दौरान बिजली निगम में कार्यरत जूनियर क्लर्क भरतलाल जैन ने कनेक्शन देने के बदले रिश्वत मांगी। Bribery Case in Rajasthan यहीं से शुरू हुआ।
एसीबी ने पकड़ा रंगेहाथ
शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (ACB) को जानकारी दी। इसके बाद टीम ने जाल बिछाया और 5 मार्च 2009 को भरतलाल जैन को 400 रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। उस समय उसने एक हजार रुपये की मांग की थी, लेकिन सौदा 500 रुपये में तय हुआ और फिर 400 रुपये लेते ही वह पकड़ा गया।
लंबी जांच और गवाहियों के बाद फैसला
एसीबी ने 2011 में चार्जशीट दाखिल की। केस में 15 गवाह और 25 दस्तावेज पेश किए गए। अदालत ने सभी साक्ष्यों को सुनने के बाद यह माना कि आरोपी ने वास्तव में रिश्वत ली थी। इस तरह Bribery Case in Rajasthan पर फैसला 16 साल बाद आया और आरोपी को दोषी करार दिया गया।
कोर्ट का आदेश
एसीबी-1 कोर्ट के न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि भ्रष्टाचार जैसे मामलों में देरी से ही सही लेकिन सख्त कार्रवाई जरूरी है। इसी आधार पर भरतलाल जैन को एक साल की कैद और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
समाज को संदेश
इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि छोटे से छोटा रिश्वत का मामला भी न्यायालय की नजर से बच नहीं सकता। Bribery Case in Rajasthan इस बात का उदाहरण है कि अगर शिकायत दर्ज की जाए और प्रक्रिया पूरी हो तो न्याय देर से ही सही, मिलता जरूर है।


