सीजी भास्कर, 01 अक्टूबर। 3,200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में आरोपित आबकारी विभाग के 30 अफसरों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने समन जारी किया है। ये वही अफसर हैं, जिन्हें इसी घोटाले को लेकर ईओडब्लयू में दर्ज केस में (Supreme Court Relief) मिली है और जमानत पर हैं। जिन आबकारी अफसरों को समन जारी किया गया है, उनमें एक अतिरिक्त कमिश्नर, पांच उपायुक्त, 14 सहायक आयुक्त, सात जिला आबकारी अधिकारी समेत तीन अन्य अधिकारी शामिल हैं। इनमें से सात अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए 3,200 करोड़ के शराब घोटाले में ईडी ने प्रदेश के सभी जिलो में पदस्थ रहे तत्कालीन करीब 30 आबकारी अधिकारियों को आरोपित बनाया गया है। जांच एजेंसी ने मनी लांड्रिंग को लेकर पीएमएलए की धारा 50 के तहत पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। इसमें ईडी ने साफ कर दिया है कि (Supreme Court Relief) मिलने के बावजूद अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाएगी।
इस घोटाले की जांच ईओडब्लू भी कर रही है। उसने चार्जशीट में उक्त अधिकारियों के नाम शामिल किए हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए ये अफसर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के लिए रायपुर स्थित विशेष कोर्ट में जाने के लिए कहा था। इस पर पिछले दिनों 28 आबकारी अधिकारी रायपुर की ईओडब्ल्यू कोर्ट में पेश हुए थे। कोर्ट ने एक-एक लाख रुपये के मुचलके पर इन्हें जमानत दी है। इसी जमानत को मीडिया रिपोर्ट्स ने (Supreme Court Relief) बताया था।
इन अफसरों को भेजा गया नोटिस
अतिरिक्त आबकारी आयुक्त आशीष श्रीवास्तव, उपायुक्त अनिमेष नेताम, विजय सेन शर्मा, अरविंद कुमार पटले, नीतू नोतानी ठाकुर, नोहर सिंह ठाकुर, प्रमोद कुमार नेताम, रामकृष्ण मिश्रा, विकास कुमार गोस्वामी, नवीन प्रताप सिंह तोमर, सौरभ बख्शी, दिनकर वासनिक, सोनल नेताम, प्रकाश पाल, आलेख राम सिदार, आशीष कोसम और राजेश जयसवाल के साथ ही सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त जीएस नुरूटी, वेदराम लहरे और एलएल ध्रुव, जिला आबकारी अधिकारी (डीइओ) इकबाल खान, मोहित कुमार जायसवाल, गरीबपाल सिंह, सेवानिवृत्त जिला आबकारी अधिकारी जेआर मंडावी, देवलाल वैद्य, एके अनंत और सहायक जिला आबकारी अधिकारी जनार्दन कौरव, नितिन खंडूजा, सहायक जिला आबकारी अधिकारी मंजूश्री कसार व एके सिंह शामिल हैं। ये सभी वर्ष 2019 और 2023 के बीच जिलों में तैनात थे।
ईडी की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि इस घोटाले में फंसे अफसरों को सिर्फ (Supreme Court Relief) मिलने से राहत नहीं मिलेगी, बल्कि मनी लांड्रिंग के पूरे मामले की गहराई से पड़ताल होगी।


