Bhim Jora Encounter in Delhi (भीम जोरा एनकाउंटर इन दिल्ली) ने उस अपराधी सफर का अंत कर दिया, जिसने पिछले डेढ़ दशक से दिल्ली, हरियाणा और उत्तर भारत के कई राज्यों में दहशत फैला रखी थी। नेपाल के बजुरा जिले का रहने वाला भीम जोरा अपराध की दुनिया में ऐसा जाल बुन चुका था, जिसे तोड़ना पुलिस के लिए आसान नहीं था।
आधी रात को चला ऑपरेशन
6 और 7 अक्टूबर की दरमियानी रात पुलिस को सूचना मिली कि जोरा (Bhim Jora Encounter in Delhi) ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित आस्था कुंज पार्क इलाके में छिपा हुआ है। स्पेशल सेल और गुरुग्राम क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने इलाके को घेर लिया। जब उसे गिरफ्तार करने की कोशिश हुई तो उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली लगने से वह घायल होकर गिर पड़ा। एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
50 हजार का इनामी बदमाश
साल 2024 में दिल्ली के जंगपुरा इलाके में डकैती के दौरान डॉ. पॉल की हत्या के बाद जोरा का नाम सुर्खियों में आया था। उसी केस में पुलिस ने उस पर 50 हजार का इनाम रखा था। इसके अलावा गुरुग्राम में एक बड़ी चोरी और कई राज्यों में हिंसक वारदातों में उसका नाम जुड़ा रहा। (Bhim Jora Encounter in Delhi)
नौकरों की भर्ती से बनाता था जाल
भीम जोरा की सबसे खतरनाक चाल उसकी प्लानिंग थी। वह नेपाल से युवाओं को भारत लाता और उन्हें घरों में काम दिलवाता। इन घरेलू नौकरों की मदद से वह घर मालिकों को खाने-पीने की चीजों में नशीला पदार्थ मिलाकर बेहोश कर देता। इसके बाद लूट, डकैती और कभी-कभी हत्या तक को अंजाम देता। यही वजह है कि पुलिस लंबे समय से उसे पकड़ने की रणनीति बना रही थी।
एजेंसियों से सांठगांठ
प्लेसमेंट एजेंसियों के एजेंट भी उसके जाल में फंस जाते थे। मुनाफे की लालच में वे उसके गिरोह के सदस्यों को घरों में भेज देते। यह नेटवर्क इतना संगठित था कि घटना के बाद आरोपी नेपाल भाग जाते और वहां से दोबारा भारत लौटकर नए सिरे से काम शुरू कर देते।
पुलिस की बड़ी सफलता
Bhim Jora Encounter in Delhi केवल एक अपराधी के खात्मे की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन सभी अपराध नेटवर्क पर भी एक बड़ा वार है जो नौकरियों और प्लेसमेंट एजेंसी की आड़ में चल रहे थे। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह के और भी सदस्य सक्रिय हैं और उनकी तलाश जारी है।


