सीजी भास्कर, 10 अक्टूबर। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के विज्ञानियों ने भारत मौसम विज्ञान विभाग और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (Solar Dimming in India) दिल्ली तथा मणिपाल विश्वविद्यालय जयपुर के सहयोग से धूप के घंटों का व्यापक अध्ययन किया है। इस शोध से चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि पिछले तीन दशकों (1988-2018) में भारत में धूप के घंटों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। देश के 20 प्रमुख मौसम विज्ञान केंद्रों के आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि धूप की अवधि में भारी कमी आई है, जिससे देश की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है।
भूभौतिकी विभाग के प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में हर वर्ष सूर्य के प्रकाश (Solar Dimming in India) की अवधि घट रही है। सबसे तेज गिरावट उत्तरी आंतरिक क्षेत्र में दर्ज की गई है, जहां लगभग 13 घंटे प्रति वर्ष की दर से धूप में कमी आई है। हिमालयी क्षेत्र में यह कमी नौ घंटे और पश्चिमी तटीय क्षेत्र में करीब 8.6 घंटे प्रतिवर्ष रही। वहीं, मध्य और पूर्वी तटीय भारत में भी मध्यम स्तर की गिरावट पाई गई, जबकि पूर्वोत्तर भारत अपेक्षाकृत स्थिर रहा।
यह लगातार घटती धूप की अवधि (Solar Dimming in India) सौर ऊर्जा, कृषि उत्पादकता और जलवायु संतुलन के लिए चिंता का विषय है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि सौर विकिरण में कमी आने से सोलर पैनलों की दक्षता घट सकती है, जिससे भारत की नवीकरणीय ऊर्जा योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को छोड़कर देश के लगभग सभी भौगोलिक हिस्सों में वार्षिक धूप अवधि में नकारात्मक रुझान दर्ज हुआ है। मानसून और लौटते मानसून के दौरान धूप में सबसे ज्यादा कमी पाई गई। यह गिरावट वायुमंडलीय प्रदूषण, बढ़ते एरोसोल्स, बादलों की अधिकता और शहरीकरण (Solar Dimming in India) जैसे कारणों से जुड़ी हुई है। इन सभी कारणों से सूर्य का प्रकाश पृथ्वी की सतह तक कम पहुंच रहा है, जिसे वैश्विक स्तर पर ‘सोलर डिमिंग’ कहा जाता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि स्वच्छ वायु और साफ आसमान सौर ऊर्जा की दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ जलवायु सहनशीलता (Solar Dimming in India) और सतत विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। यह अध्ययन भारत की पर्यावरण नीतियों, नवीकरणीय ऊर्जा योजना और कृषि प्रबंधन रणनीतियों को नया दृष्टिकोण देगा। यह शोध नेचर पोर्टफोलियो की अंतरराष्ट्रीय पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुआ है।
जलवायवीय क्षेत्रवार धूप के घंटे में गिरावट
भौगोलिक क्षेत्र गिरावट (प्रतिवर्ष)
नार्थर्न इनलैंड 13.15 घंटे
हिमालय क्षेत्र 9.47 घंटे
वेस्ट कोस्ट 8.62 घंटे
ईस्ट कोस्ट 4.88 घंटे
डेक्कन पठार 3.05 घंटे
नार्थ-ईस्टर्न क्षेत्र 1.33 घंटे


