बिलासपुर। (High Court Employee Case) में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक मामले के लंबित रहने से विभागीय कार्यवाही स्वतः समाप्त नहीं होती और न ही उसे अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया जा सकता। यह निर्णय सरकारी कर्मचारियों और वित्तीय संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ग्रामीण बैंक की याचिका पर सुनवाई और मामला
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक में शाखा प्रबंधक पद पर कार्यरत कर्मचारी पर वित्तीय अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग के आरोप लगे। बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और भारतीय दंड संहिता की धाराओं 409, 420 और 120-बी के तहत आपराधिक मामला दर्ज कराया। साथ ही बैंक ने मैनेजर के विरुद्ध विभागीय जांच भी शुरू की, जिसमें गवाहों से पूछताछ और क्रॉस-एग्ज़ामिनेशन शामिल था।
High Court Employee Case: सिंगल बेंच का आदेश और बैंक की अपील
सिंगल बेंच ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद बैंक को निर्देश दिया कि आपराधिक मुकदमे के लंबित रहने तक विभागीय कार्यवाही का अंतिम आदेश पारित न किया जाए। बैंक ने इस आदेश के खिलाफ डीविजन बेंच में अपील दायर की, यह तर्क देते हुए कि आपराधिक मुकदमा लगभग पूरा होने वाला था और विभागीय प्रक्रिया में अंतिम आदेश पारित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
डीविजन बेंच का निर्देश: स्थगन केवल एक उचित अवधि के लिए
डीविजन बेंच ने सुनवाई में कहा कि आपराधिक मुकदमे के लंबित रहना केवल एक उचित अवधि के लिए विभागीय कार्यवाही स्थगित करने का कारण हो सकता है। किसी भी कर्मचारी द्वारा लंबी अवधि का उपयोग विभागीय प्रक्रिया को अनिश्चित काल के लिए विलंबित करने के लिए नहीं किया जा सकता। बेंच ने बैंक प्रबंधन को आरोपी मैनेजर के खिलाफ विभागीय कार्यवाही में अंतिम आदेश पारित करने की अनुमति दे दी।
High Court Employee Case: प्रशासन और कर्मचारियों के लिए प्रभाव
यह फैसला सरकारी कर्मचारियों और बैंक कर्मचारियों दोनों के लिए अहम है। इससे स्पष्ट हो गया कि आपराधिक मामलों के लंबित रहने से विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई पर स्वतः रोक नहीं लगती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रक्रिया का अनिश्चित काल के लिए विलंब न हो और उचित समय सीमा में निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।




