सीजी भास्कर, 27 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ का हर कोना अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक विरासत और लोककथाओं से भरा है, लेकिन इन सबके बीच जशपुर जिले का रानीदाह जलप्रपात (Rani Dah Waterfall Chhattisgarh) अपने आप में एक अनमोल रत्न है। घने जंगलों और ऊँची-नीची पहाड़ियों के बीच बसा यह झरना न सिर्फ मन को सुकून देता है, बल्कि यहाँ की किंवदंती, हरियाली और धार्मिक आस्था इसे एक अद्भुत पर्यटन स्थल बनाती है।
मानसून में दिखता है सबसे खूबसूरत रूप
रानीदाह जलप्रपात का सबसे आकर्षक दृश्य मानसून के दौरान देखने को मिलता है, जब जलधारा चट्टानों को चीरती हुई विशाल कुंड में गिरती है। बारिश के मौसम में आसपास की हरियाली, धुंध और झरने की गूंज मन को मंत्रमुग्ध कर देती है।
एडवेंचर, फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह झरना एक स्वर्ग समान है। जहां हर पल कैमरे में कैद करने लायक दृश्य मिलता है।
जशपुर की पहाड़ियों के बीच प्राकृतिक सौंदर्य का नजारा
यह झरना जशपुर जिला मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर दूरी पर (Rani Dah Waterfall Chhattisgarh) आरा मार्ग पर स्थित है। मुख्य सड़क से लगभग 5 किमी अंदर घने जंगलों और टेढ़े-मेढ़े रास्तों के बीच यह स्थान पहुंचने योग्य है। झरने के पास एक सुंदर व्यू पॉइंट, सीढ़ियाँ और पिकनिक स्पॉट बनाए गए हैं ताकि पर्यटक सुरक्षित रूप से प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद उठा सकें।
रानी शिरोमणि की प्रेमकथा से जुड़ा है नाम ‘रानीदाह’
कहा जाता है कि उड़ीसा की रानी शिरोमणि अपने प्रेमी के साथ भागकर जशपुर के जंगलों में आई थीं। जब उनके भाई उन्हें खोजते हुए यहाँ पहुंचे, तब उन्होंने इसी झरने के पास आत्मसमर्पण किया। इसी घटना की याद में इस झरने का नाम पड़ा “रानीदाह”, अर्थात् “रानी का स्थान”। यहां आज भी रानी की समाधि और “पंचमैया” नामक स्थल मौजूद है, जो उनके पाँच भाईयों की स्मृति से जुड़ा हुआ है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
झरने के निकट स्थित प्राचीन शिव मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है। हर वर्ष सावन मास में यहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं। रानीदाह न केवल प्राकृतिक दृष्टि से सुंदर है, बल्कि इसका ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी छत्तीसगढ़ के लोकमानस में गहराई से रचा-बसा है। जशपुर से लगभग 18 किमी की दूरी पर आरा मार्ग से होकर पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन रांची और अंबिकापुर हैं। रायपुर और रांची एयरपोर्ट से यहां तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह झरना वर्षभर खुला रहता है, लेकिन इसे देखने का सबसे अच्छा समय जून से फरवरी के बीच माना जाता है।
प्रकृति, इतिहास और रोमांच का संगम
रानीदाह जलप्रपात न केवल छत्तीसगढ़ टूरिज्म का गौरव है, बल्कि यह उन यात्रियों के लिए भी प्रेरणादायक स्थल है जो प्रकृति की गोद में सुकून तलाशते हैं। यहां की हर बूंद, हर हवा और हर हरियाली उस अनकही कहानी को बयां करती है, जिसमें प्रेम, त्याग और प्रकृति का अद्भुत मेल दिखाई देता है।


