सीजी भास्कर, 01 नवंबर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने आदेश की अवहेलना के मामले में राज्य के दो आईएएस अधिकारियों (IAS Contempt Case) को तलब किया है। न्यायालय ने इन अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि अदालत के आदेश का जानबूझकर पालन न करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। मामला जांजगीर-चांपा जिले के एक पटवारी महादेव देवांगन के स्थानांतरण आदेश से जुड़ा है, जिसकी वैधता को अदालत में चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ता महेश देवांगन ने अधिवक्ता संदीप दुबे और मानस वाजपेयी के माध्यम से यह याचिका दाखिल की थी। इस पर न्यायमूर्ति एन.के. व्यास की एकलपीठ में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि हाई कोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जो न्यायालयीन आदेश की सीधी अवहेलना है।
इस पर अदालत ने नाराजगी जताई और कहा कि अधिकारियों ने जानबूझकर (IAS Contempt Case) न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह मामला अवमानना (Contempt of Court) की श्रेणी में आता है और इसमें विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने आदेश दिया कि संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर साधारण व पंजीकृत डाक दोनों माध्यम से नोटिस जारी किया जाए।
आदेश की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी”
न्यायमूर्ति एन.के. व्यास ने कहा कि 8 अगस्त 2025 को पारित आदेश की जानबूझकर अवज्ञा करने का मामला बेहद गंभीर है। न्यायालय ने संकेत दिया कि अवमानना कार्रवाई शुरू करने (IAS Contempt Case) पर विचार किया जाएगा और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित होंगे। अदालत ने साफ किया कि न्यायालयीन आदेशों का पालन प्रशासनिक जिम्मेदारी के अंतर्गत अनिवार्य है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में किसी भी विभाग द्वारा ऐसे आदेशों की अनदेखी की गई, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह है पूरा मामला
जांजगीर-चांपा जिले में पदस्थ पटवारी महादेव देवांगन ने अपने स्थानांतरण आदेश को चुनौती देते हुए अधिवक्ता संदीप दुबे के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि स्थानांतरण के तुरंत बाद याचिकाकर्ता ने स्थानांतरण समिति के समक्ष अभ्यावेदन पेश किया था, जो आज तक लंबित है।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा था कि 5 जून 2025 की स्थानांतरण नीति (Transfer Policy) के अनुसार आदेश के विरुद्ध अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का प्रावधान है, जिस पर समिति को कानून के अनुसार विचार करना होगा। परंतु अधिकारियों द्वारा इस आदेश की अनुपालना न करने पर अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही माना। मामले की अगली सुनवाई अब 16 दिसंबर 2025 को होगी, जिसमें तीनों संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।


