सीजी भास्कर 11 नवम्बर मध्य प्रदेश के इंदौर में बीते साल दिसंबर में पुलिस ने तीन तस्करों — जोहर हुसैन, इम्तियाज खान और सलमान पियारजी — को 65 किलो काले हिरण (Black Buck) के मांस के साथ गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि ये कोई आम शिकारी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा थे, जो (Wildlife Smuggling in India) के लिए विदेशों से हंटिंग तकनीक सीखकर लौटे थे।
मोबाइल डिकोडिंग में 500 से अधिक वीडियो और तस्वीरें मिलीं, जिनमें संरक्षित प्रजातियों का निर्मम शिकार दर्ज था। बावजूद इसके, 11 महीनों से जांच रफ्तार नहीं पकड़ पाई है।
जब जंगलों में गूंजे गोलियों के सन्नाटे
एसटीएसएफ (स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स) अब तक केवल एक आरोपी सुबाह पुत्र सलाहुद्दीन तक पहुंच पाई है। उसे मुंबई से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाकी गिरोह के सदस्य अब भी फरार हैं। सुबाह की भूमिका मुख्य रूप से शिकार के बाद “डीलिंग” करने और ग्राहकों से संपर्क कराने की थी।
फॉरेंसिक टीम उसके मोबाइल से डिलीट डेटा रिकवर कर रही है। कई व्हाट्सऐप ग्रुप (WhatsApp Groups related to Hunting) मिले हैं, जहां तस्कर वन्यजीवों की तस्वीरें और सौदे तय करते थे।
जमानत पर रोक, साक्ष्य बने दीवार
तीनों गिरफ्तार आरोपी — सलमान, इम्तियाज और हुसैन — अभी जेल में हैं। विशेष न्यायालय ने अब तक उनकी जमानत याचिकाएं तीन बार खारिज की हैं। कानूनी सूत्रों के मुताबिक, अदालत ने पाया कि आरोपियों के मोबाइल में कई जानवरों की खाल, सींग और ट्रॉफी की तस्वीरें (Animal Trophies Evidence) मौजूद हैं।
बिश्नोई समाज ने भी अदालत में आपत्ति दर्ज कराई है, जिससे यह केस और गंभीर रूप ले चुका है।
तस्करों का जंगल नेटवर्क और विदेशी लिंक
जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्यों के अलग-अलग रोल थे — कोई शिकारी, कोई खाल निकालने वाला, कोई ग्राहक से जोड़ने वाला।
लोकेशन ट्रैकिंग से खुलासा हुआ कि ये लोग विदिशा, रायसेन, गुना, शाजापुर और सागर के जंगलों में सक्रिय थे।
शिकार के बाद आरोपी हिरण और चीतल के शवों के साथ फोटो खिंचवाते थे, जिन्हें बाद में ग्राहकों को भेजा जाता था ताकि “माल असली” होने का भरोसा दिलाया जा सके।
जब्त सामानों में 65 किलो मांस, एक स्वीडिश बंदूक, तीन जिंदा कारतूस, चार मोबाइल और एक वाहन शामिल हैं।
देश से जुड़ा शिकारी नेटवर्क
इम्तियाज खान के पास यूएई आईडी (UAE ID) मिला है। उसकी मुंबई में मसालों की फैक्ट्री है, जो खाड़ी देशों में सप्लाई करती है। इस व्यापार की आड़ में वह बार-बार विदेश जाता था, जहां से उसने हंटिंग और स्किनिंग (Skinning Techniques) के तरीके सीखे।
हुसैन भी कई बार विदेश यात्राएं कर चुका है, जबकि भोपाल का निशानेबाज आमिर, जो हिरणों को मारता था, अब भी फरार है।
जब शिकारी खुलेआम घूमे, और व्यवस्था सोती रही
तफ्तीश में यह भी सामने आया कि कई बार ये शिकारी वन विभाग की आंखों के सामने जंगलों में घूमते थे। कुछ कर्मचारियों की भूमिका जांच के घेरे में है, जिन्होंने संभवतः मोटी रकम लेकर मुंह मोड़ लिया।
अभी एसटीएसएफ कई संदिग्धों पर नज़र रख रही है, मगर इतने महीनों बाद भी केस का कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला।




