सीजी भास्कर, 30 नवंबर। आरबीआइ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 25 नवंबर को 13 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश ने बाजार से 25,100 करोड़ रुपये का कर्ज उठाया है। यह वित्त वर्ष 2025-26 की मौजूदा तिमाही का सर्वाधिक साप्ताहिक उधार है, मगर (State Debt Crisis) के बीच यह राज्यों की पूरी तस्वीर नहीं बताता। हकीकत यह है कि बढ़ते कर्ज और आर्थिक नीतियों पर कमजोर भरोसे की वजह से राज्य जितना कर्ज लेना चाहते हैं, उतना उठा नहीं पा रहे।
आरबीआइ के आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर और नवंबर में राज्यों को जितना कर्ज चाहिए था, उसका केवल 68 प्रतिशत ही मिल सका। पंजाब, बिहार, छत्तीसगढ़, केरल, राजस्थान और बंगाल जैसे राज्यों के लिए यह स्थिति और गंभीर है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो कई राज्यों में आने वाले महीनों में नकदी संकट, वेतन-पेंशन भुगतान में दिक्कत और वित्तीय अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है—जिसका सीधा संकेत (State Debt Crisis) से मिलता है।
25 नवंबर के आंकड़ों के अनुसार 13 राज्यों (तेलंगाना, उत्तराखंड, बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, सिक्किम, मणिपुर, केरल, गुजरात, हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़ और गुजरात) तथा जम्मू-कश्मीर ने 26,550 करोड़ रुपये की राज्य प्रतिभूतियां (एसजीएस) जारी कीं, जबकि बिक्री केवल 25,067 करोड़ रुपये की हो पाई।
इक्रा की प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नैयर के अनुसार यह उधार भले इस तिमाही का सबसे बड़ा हो, लेकिन यह राज्यों की घोषित उधारी से पांच प्रतिशत कम है। खास बात यह रही कि पंजाब और छत्तीसगढ़ ने अपनी 8 और 10 वर्ष की प्रतिभूतियों पर आई बोलियों को आंशिक रूप से ही स्वीकार किया, जिसके कारण कुल उधारी घोषित राशि से 1500 करोड़ रुपये कम रही यानी (State Debt Crisis) की स्थिति और स्पष्ट हो गई। अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान राज्य अब तक अपनी उधारी योजना से 32 प्रतिशत पीछे हैं।
ब्याज दरों पर भी प्रभाव पड़ा है। इस सप्ताह औसत ब्याज दर पिछले सप्ताह की तुलना में 0.16 प्रतिशत बढ़कर 7.29 प्रतिशत तक पहुंच गई। यही नहीं, इस सप्ताह लिए गए 64 प्रतिशत कर्ज अधिक परिपक्वता अवधि वाले (Long Maturity) हैं, जो 15 से 30 वर्ष तक चलते हैं। इससे वर्तमान कर्ज का भारी बोझ सीधे भविष्य की पीढ़ी पर डाला जा रहा है जो (State Debt Crisis) का सबसे बड़ा संकेत है।
आरबीआइ के अनुसार पिछले सप्ताह औसत परिपक्वता अवधि 12 वर्ष थी, जो इस सप्ताह बढ़कर 15 वर्ष हो गई। यानी राज्य हर हाल में कर्ज लेने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अपनी वास्तविक जरूरत के अनुरूप धन नहीं जुटा पा रहे। वित्त मंत्रालय को भी इस स्थिति का अंदेशा है। इसी कारण अप्रैल- जून 2025 के दौरान राज्यों को हस्तांतरित औसत मासिक किस्त 81-82 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 89 हजार करोड़ और अक्टूबर 2025 में 1.01 लाख करोड़ रुपये कर दी गई। इससे (State Debt Crisis) की गंभीरता और स्पष्ट होती है।
