सीजी भास्कर, 30 नवंबर। उत्तराखंड के पावन बदरीनाथ धाम के कपाट (Badrinath Kapat Close) शीतकाल के लिए विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए। कपाट बंद होते ही राज्य की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा भी शीतकालीन विराम में चली गई। इस पवित्र अवसर पर 5,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान बदरी विशाल के दर्शन कर पुण्य अर्जित किया।
इससे पहले, गंगोत्री के कपाट (Badrinath Kapat Close) 22 अक्टूबर को, जबकि यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट 23 अक्टूबर को ही बंद किए जा चुके हैं। बदरीनाथ धाम, जो चमोली जिले में समुद्रतल से 10,277 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, वहाँ कपाट बंद करने की प्रक्रिया ब्रह्ममुहूर्त में महाभिषेक पूजा के साथ शुरू हुई।
सुबह बाल भोग के बाद दर्शन जारी रहे और दोपहर 12:15 बजे रावल अमरनाथ नंबूदरी की अगुआई में विशेष पूजा संपन्न की गई। शीतकाल के लिए भगवान बदरी विशाल को माणा गांव की कन्याओं द्वारा तैयार घृत कंबल ओढ़ाया गया। इसके बाद परंपरानुसार मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।
बुधवार को भगवान बदरी विशाल की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थलों—पांडुकेश्वर और ज्योतिर्मठ—के लिए रवाना होगी, जहाँ पूरे शीतकाल में भक्त भगवान के दर्शन कर सकेंगे।
इस अवसर पर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, तीर्थ पुरोहित और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। इस वर्ष बदरीनाथ धाम ने 16.60 लाख और चारों धामों ने कुल 50 लाख से अधिक यात्रियों की ऐतिहासिक संख्या दर्ज की, जो अब तक का एक नया रिकॉर्ड है।
