सीजी भास्कर 8 दिसम्बर गरियाबंद। Surrendered Maoists Exam :गरियाबंद जिले में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जहाँ हिंसा से दूरी बना चुके 22 पूर्व माओवादी पहली बार किसी औपचारिक परीक्षा में बैठे। उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत हुई इस महापरीक्षा ने इन लोगों की ज़िंदगी में एक नई शुरुआत का दरवाज़ा खोल दिया।
यह पहल सिर्फ साक्षरता नहीं, बल्कि जीवन को दोबारा सँवारने का अवसर दे रही है—यही कार्यक्रम का असल मकसद है।
शिक्षा की ओर लौटने का साहस
परीक्षा सात दिसंबर को शांतिपूर्ण माहौल में आयोजित की गई। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जिन लोगों ने कभी जंगल और बंदूक को अपनी नियति मान लिया था, वे आज कॉपी-कलम लेकर भविष्य की तरफ बढ़ रहे हैं।
इनमें कई ऐसे हैं जो बताते हैं कि राज्य की पुनर्वास नीति के (Rehabilitation Support) कारण उन्होंने नया जीवन अपनाने का निर्णय लिया।
Surrendered Maoists Exam : कौशल विकास से रोज़गार की उम्मीद
सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, इन 22 लोगों को कौशल प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
लाइवलीहुड कॉलेज गरियाबंद में चल रहे तीन प्रमुख ट्रेड इसका आधार हैं—
• सिलाई मशीन प्रशिक्षण
• वाहन चालक प्रशिक्षण
• प्लंबर प्रशिक्षण
ये कोर्स सिर्फ नौकरी पाने तक सीमित नहीं, बल्कि स्थायी आय और सम्मानजनक जीवन की दिशा में कदम हैं।
नए भविष्य की तैयारी
प्रशिक्षकों के अनुसार, प्रशिक्षण के दौरान इन प्रतिभागियों का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। कई महिलाएँ सिलाई सीखकर घर-आधारित छोटे व्यवसाय शुरू करने की तैयारी में हैं। वाहन चालक प्रशिक्षण से युवाओं के लिए परिवहन क्षेत्र में नौकरियों की संभावना बढ़ी है, जबकि प्लंबिंग को आजीविका का स्थायी साधन माना जा रहा है।
Surrendered Maoists Exam : समाज में सम्मानजनक स्थापित करना
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन्हें सिर्फ आत्मसमर्पण लाभ ही नहीं दिए जा रहे, बल्कि आगे आने वाली सभी जनकल्याणकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा।
एक अधिकारी के शब्दों में—
“मकसद केवल हथियार छोड़वाना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा भविष्य देना है जहाँ वे खुद को सम्मान और सुरक्षा के साथ देख सकें।”


