सीजी भास्कर, 14 दिसंबर। रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों के माध्यम से लोगों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा बस्तर संभाग में डेयरी व्यवसाय (Bastar Dairy Development) को सशक्त रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से कांकेर और कोण्डागांव जिले में पायलट परियोजना के तहत डेयरी विकास की पहल की जा रही है, जिसके माध्यम से विशेष रूप से जनजातीय महिलाओं को डेयरी व्यवसाय से जोड़ा जा रहा है। इस योजना का शुभारंभ 01 जून 2025 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा कोण्डागांव जिले के भोंगापाल गांव से किया गया था।
दुधारू पशु प्रदाय की दिशा में ठोस प्रगति
बस्तर संभाग के कोण्डागांव एवं कांकेर जिले के 125 हितग्राहियों को ऋण एवं अनुदान पर दुधारू पशु प्रदाय (Bastar Dairy Development) का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 47 अनुसूचित जनजाति महिला हितग्राहियों के आवेदन पत्रों को बैंकों द्वारा ऋण स्वीकृत किया जा चुका है, जिनमें से 24 महिलाओं को 36 दुधारू पशु वितरित किए गए हैं।
हितग्राहियों को उच्च गुणवत्ता की दुधारू गाय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एनडीडीबी डेयरी सर्विसेस द्वारा साहीवाल नस्ल की गायों का चयन किया गया है, जिनकी प्रतिदिन दूध उत्पादन क्षमता 8 से 10 लीटर है। इन गायों को राजस्थान एवं पंजाब क्षेत्र से चिन्हित कर अनुसूचित जनजाति महिलाओं को वितरित किया जा रहा है।
दुग्ध संकलन और विपणन की सुदृढ़ व्यवस्था
वर्तमान में दुग्ध महासंघ (Bastar Dairy Development) द्वारा बस्तर संभाग अंतर्गत 95 कार्यशील दुग्ध समितियों के माध्यम से 4006 दुग्ध उत्पादकों से प्रतिदिन 15060 लीटर दूध का संकलन किया जा रहा है। इसमें से लगभग 8000 लीटर दूध प्रतिदिन कांकेर, कोण्डागांव, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर एवं नारायणपुर जिलों में विपणन किया जा रहा है।
आगामी पाँच वर्षों में सहकारिता का विस्तार
बस्तर संभाग में सहकारिता को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए आगामी पाँच वर्षों में 400 नए ग्रामों को दुग्ध समितियों के माध्यम से जोड़े जाने की योजना है। इस विस्तार के माध्यम से लगभग 9000 नए दुग्ध उत्पादक जुड़ेंगे और प्रतिदिन 48 हजार लीटर दूध का संकलन किया जाएगा। इसके साथ ही 28 हजार लीटर क्षमता के दुग्ध शीतलीकरण केंद्रों की स्थापना तथा बस्तर जिले में 1 लाख लीटर क्षमता के नवीन दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र की स्थापना भी प्रस्तावित है।
अनुदान, ऋण और तकनीकी सहयोग
यह योजना राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की सहायक कंपनी एनडीडीबी डेयरी सर्विसेस के सहयोग से क्रियान्वित की जा रही है। योजना के अंतर्गत दो दुधारू पशुओं की कुल लागत 1.40 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें 50 प्रतिशत राशि के रूप में 70 हजार रुपये का अनुदान राज्य सरकार द्वारा प्रदान किया जा रहा है। शेष 40 प्रतिशत राशि बैंक ऋण के रूप में तथा 10 प्रतिशत राशि हितग्राही द्वारा वहन की जाती है।
ऋण सुविधा के लिए समझौता ज्ञापन
अनुसूचित जनजाति महिला किसानों को सहज ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के साथ समझौता ज्ञापन किया गया है। इसके अंतर्गत रियायती ब्याज दर पर चार वर्ष की अवधि के लिए ऋण प्रदान किया जाता है। ऋण की किश्तों की वसूली दुग्ध महासंघ द्वारा हितग्राही किसानों के दूध बिल से कटौती कर सीधे बैंक में जमा की जाती है।
निःशुल्क सहायता और प्रशिक्षण की व्यवस्था
योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को एक वर्ष की अवधि के लिए निःशुल्क सहायता प्रदान की जा रही है। इसमें एक वर्ष के लिए गाय का बीमा, पशु स्वास्थ्य निगरानी उपकरण, प्रतिदिन प्रति पशु 5 किलोग्राम साइलेज चारा, 2 किलोग्राम पशु आहार एवं 50 ग्राम खनिज मिश्रण शामिल है। पशु प्रदाय से पूर्व एवं पशु प्राप्ति के बाद वैज्ञानिक पशु प्रबंधन प्रणाली पर किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसके अतिरिक्त पशु चिकित्सा विभाग द्वारा पशु प्रजनन एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
आजीविका और आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम
डेयरी इकाई की स्थापना के पश्चात अनुसूचित जनजाति महिला हितग्राहियों द्वारा घरेलू उपयोग के बाद शेष दूध का क्रय दुग्ध महासंघ द्वारा निर्धारित मूल्य पर किया जाता है। दुग्ध संकलन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए नई दुग्ध समितियों की स्थापना एवं दुग्ध संकलन मार्गों का गठन किया गया है।
एक अनुसूचित जनजाति महिला हितग्राही द्वारा प्रतिदिन औसतन 12 लीटर दूध दुग्ध समिति में दिया जा रहा है, जिससे उसे प्रति माह लगभग 13 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। यह योजना जनजातीय महिलाओं की आजीविका सुदृढ़ करने, पोषण स्तर सुधारने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है।


